शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी
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शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने अयोध्या मामले में आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर व अन्य अनधिकृत व्यक्तियों के समझौता प्रस्ताव को नकार दिया है। बोर्ड के चेयरमैन सैयद वसीम रिजवी ने शनिवार को फिर दुहराया कि अयोध्या में विवादित भूमि शिया वक्फ बोर्ड की है। इसको लेकर बोर्ड उच्चतम न्यायालय में अपना दावा पेश कर चुका है।
रिजवी ने अयोध्या में विवादित भूमि पर श्रीराम मंदिर की जगह मठ व स्कूल बनाए जाने के श्रीश्री व अन्य अनधिकृत व्यक्तियों के प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया। उन्होंने कहा कि शिया वक्फ बोर्ड अपना समझौता प्रस्ताव व जवाब सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत कर चुका है।
अगर किसी को मध्यस्थता या समझौते की बातचीत करनी है तो उसे शिया वक्फ बोर्ड के प्रस्ताव पर ही बात करनी होगी। अगर कोई समझौता नहीं हो सका तो उच्चतम न्यायालय का फैसला ही बोर्ड को स्वीकार होगा।
उन्होंने बताया कि वक्फ बोर्ड की 14 व 15 फरवरी को हुई अहम बैठक में पूर्ण बहुमत से फैसला लिया गया कि शिया बोर्ड अयोध्या मामले में उच्चतम न्यायालय में प्रस्तुत अपने जवाब पर कायम रहेगा। मंदिर के पक्षकारों की सहमति के बाद शीर्ष अदालत में जो समझौता प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया है, उसमें इस बात पर सहमति बन चुकी है कि अयोध्या में विवादित स्थल पर श्रीराम मंदिर बनेगा।
अयोध्या, फैजाबाद व 14 कोसी परिक्रमा की सीमा में कोई नई मस्जिद नहीं बनेगी। मस्जिद लखनऊ शहर में बनेगी, जिसका नाम मस्जिद-ए-अमन होगा। इसके इतर किसी भी समझौते के प्रस्ताव से बोर्ड सहमत नहीं है।