‘हमें थकने नहीं देती जिम्मेदारियों का पहाड़’, ‘रोटी खरीद लाया हूं तलवार बेंचकर’ को अब कौन सुनाएगा।
शनिवार को शायर मेराजुल हक ‘मेराजुल फैजाबादी’ ने बड़ी खामोशी से इस दुनिया को अलविदा कह दिया।
ठीक वैसे ही जैसे ‘लोकेषणा-वित्तेषणा’ व शोर शराबे से दूर वे ताउम्र सृजनधर्मी साधनारत रहे।
अदबी जगत में छाई खामोशी
यह जरूर है कि घटाटोप अंधेरे का चीरते उनके ‘अगिभनधर्मी शब्द’ लोगों के मस्तिष्क को शुद्ध करते रहे। कोला शरीफ ही नहीं समूची अदबी जगत में खामोशी छाई हुई है। वे छोटे से गांव से निकले और अदब की दुनिया को अपनी शायरी से रोशन कर दिया।
जहां भी गए, फैजाबाद की छाप नुमाया की। कोला की माटी से उठी शायरी की खुशबू बहुत दूर तक गई। यहां की उर्वर माटी ने अदब की दुनिया की अजीम हस्ती को जना।
अनुभव के ताप पर रची-बसी उनकी रचनाएं जिस्म से सीधे रूह तक उतर जाती थी। शायद इसी लिए उनकी रचनाओं को ‘कंठावास’ जैसा अहम् मुकाम हासिल हुआ।
71 वर्ष की उम्र में कैंसर के कारण उनकी सांसों की डोर लखनऊ में टूट गई।
कोला के सिराजुल हक के घर 71 वर्ष पहले जिस बच्चे ने इस दुनिया में कदम रखा, उसमें असीम संभावनाएं छिपी थी। नाम रखा गया मेराजुल हक जो अदब की दुनिया में मेराज फैजाबादी नाम से रोशन हुआ।
वर्ष 1962 में लखनऊ विश्वविद्यालय से बीएससी करने वाले शायर मेराज की तीन संग्रहों ‘नामूश’, ‘थोड़ा सा चंदन’ और ‘बेख्वाब साअते’ ने लोगों ने दिलोदिमाग को मथ कर रख दिया।
पुरसुकून देती रही शायरी
अपनी शायरी के जरिए वे चिंतन के ऐसे आकाश पर पहुंचा देते थे, जहां पर वैचारिक खेमेबंदी, धार्मिक हदबंदी, सियासी मोर्चेबंदी सब के सब खुद-ब-खुद टूट जाती थी। मेराज की शायरी उन हर कोनों को स्पर्श करती है जहां दर्द है, तड़प है, नाइंसाफी है।
घरेलू व पारिवारिक वफादारियों की शायरी का एक मिसाल तो देखिए ‘मुझे थकने नहीं देता ये जरूरतों का पहाड़, मेरे बच्चे मुझे बूढ़ा नहीं होने देते..’।
सांप्रदायिकता पर किया कटाक्ष
उनकी शायरी ने गुरबत के स्वाभिमान की रक्षा करना दूसरे को सिखाया। सांप्रदायिक नफरत की सियासत और उसकी कोख से पैदा हुए फसाद की विभीषिका पर उन्होंने चेताया ‘हमारी नफरतों की आग में सब कुछ न जल जाए, कि इस बस्ती में हम दोनों को रहना भी है’।
शायर मेराज फैजाबादी का शरीर शनिवार को ही उनके गांव कोला शरीफ में सिपुर्दे खाक कर दिया गया। इस अवसर कई नामचीन लोगों के साथ विधायक मित्रसेन यादव, सूर्यकांत पांडेय, वकील, पत्रकार और आसपास के लोग शामिल थे।
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष व सांसद डा. निर्मल खत्री ने शायर मेराज फैजाबादी के निधन पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने कहा कि उनके निधन समाज की अपूरणीय क्षति हुई है।