लखनऊ। छठ पूजा के गीतों से पूरी दुनिया में छाने वाली मशहूर गायिका शारदा सिन्हा ने छठ पूजा के पहले ही दिन दुनिया से विदा ले ली। अपनी सुरीली आवाज से उन्होंने न सिर्फ मैथिली और भोजपुरी संगीत को नई पहचान दी, बल्कि हिंदी सिनेमा में भी खास जगह बनाई। वह लंबे समय से कैंसर से जूझ रही थीं। संगीत में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें पद्मश्री और पद्मभूषण पुरस्कार से भी नवाजा गया।
शारदा सिन्हा के प्रशंसक दुनिया भर में फैले हैं। लखनऊ भी इससे अछूता नहीं है। 2022 में लखनऊ में हुए एक भव्य कार्यक्रम में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने उनको ‘लोक निर्मला सम्मान’ से नवाजा था। पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने अपनी मां निर्मला अवस्थी की स्मृति में 2020 में यह सम्मान समारोह शुरू किया था। मालिनी अवस्थी बताती हैं कि मेरे उनसे 25 साल पुराने पारिवारिक रिश्ते रहे। हर सुख-दुख में वह, मेरे और मैं उनके साथ रहती थी। अभी कुछ माह पहले ही बिहार गई तो उनसे भेंट हुई थी। सम्मान समारोह के बारे में पूछने पर मालिनी कहती हैं कि जिसके नाम में ही ज्ञान और संगीत हो, ऐसी गायिका को सम्मानित करके लखनऊ ही गौरवान्वित हुआ।
मालिनी अवस्थी बताती हैं कि वह खुद में लोक गायिकी का एक स्कूल थीं। ऐसे विरले कलाकार ही होते हैं जो अपनी कला के दम पर माटी की खुशबू दुनिया में बिखेरने की ताकत रखते हों। भोजपुरी, मगही और मैथिली भाषाओं में विवाह और छठ के गीतों के साथ ही सलमान खान की फिल्म मैंने प्यार किया का ‘कहे तोसे सजना तोहरी सजनिया...’ हो या फिर गैंग्स ऑफ वासेपुर का ‘तार बिजली से पतले हमारे पिया...’ को आवाज देकर उन्होंने करोड़ों प्रशंसक जुटाए थे।
उनको याद करते हुए पद्मश्री वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. विद्या बिंदु सिंह कहती हैं कि 2022 में जब वह लखनऊ आईं तो तमाम बातें हुईं। वह लखनऊ के कलाप्रेमियों की बहुत कद्रदान थीं। कहती थीं कि कलाकार को श्रोता ही बनाते हैं। यहां के लोग इतने प्यार से सुनते हैं कि गाने में बहुत मजा आता है। कार्यक्रम वाले दिन जब उन्होंने मंच संभाला तो तबीयत खराब होने के बाद भी रुकने का नाम नहीं ले रही थीं। लोगों की तालियां, उनका उत्साह देख वह गाती ही जा रही थीं और श्रोता भी पूरा लुत्फ ले रहे थे। उन्होंने अपनी गायिकी से लखनऊ को भी अपना दीवाना बना दिया था।