किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग क्वीन मेरी में शनिवार को एक प्रसूता रेशमा (20) और उसके गर्भ में पल रहे शिशु ने दम तोड़ दिया।
इसके साथ ही आठ दिन में क्वीन मेरी में डॉक्टरों की लापरवाही में मरने वाली प्रसूतओं की संख्या बढ़कर आठ हो गई है।
जच्चा-बच्चा की मौत से आक्रोशित परिजनों ने विरोध दर्ज कराया लेकिन उन्हें सिक्योरिटी गार्डों ने बाहर निकाल दिया गया।
एसजीपीजीआई केपास स्थित सभाखेड़ा निवासी सुंदर ने बताया कि रेशमा (20) को शुक्रवार रात लगभग नौ बजे क्वीन मेरी लाया गया था।
इमरजेंसी के डॉक्टरों ने उसकी हालत गंभीर बताते हुए रात को ही सीजेरियन प्रसव करने की बात कही और चार यूनिट ब्लड और दो यूनिट प्लाज्मा का इंतजाम करने के लिए कहा।
परिवारवालों ने आनन-फानन में इसका इंतजाम कर डॉक्टरों को दे दिया।
रात को लेबर रूम में रेशमा और उसकी मां राजकुमारी ही थीं। लगभग 12.30 बजे चिकित्सकों ने रेशमा का सामान्य प्रसव कराने का प्रयास शुरू कर दिया। इससे उसकी हालत बिगड़नी शुरू हो गई।
राजकुमारी को बेटी की हालत देखी नहीं गई तो उसने सीजेरियन प्रसव के लिए चिकित्सकों से कहा।
बात मानने की जगह डॉक्टरों ने राजकुमारी को लेबर रूम से बाहर निकाल दिया। इसी बीच रेशमा की हालत ज्यादा बिगड़ गई।
आनन-फानन में उसका सीजेरियन प्रसव कराने की कोशिश की गई लेकिन तब तक बच्चे की मौत हो चुकी थी और रेशमा को ओटी में ही सांस लेने में दिक्कत होने लगी।
इस पर चिकित्सकों ने उसे आईसीयू या वेंटीलेटर यूनिट भेजने की जगह एम्बू बैग लगाकर पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया।
शुक्रवार आधी रात से जिंदगी-मौत के बीच जूझते हुए रेशमा ने शनिवार दोपहर करीब एक बजे दम तोड़ दिया।
रेशमा की मां राजकुमारी ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। परिवारवालों ने सीएमएस प्रो.एससी तिवारी को कॉल किया लेकिन उन्होंने मोबाइल फोन नहीं उठाया।
इसी बीच सिक्योरिटी गार्डों ने परिवारवालों को वहां से जबरदस्ती भगा दिया।