लोकसभा चुनाव का समय नजदीक आने के साथ ही यूपी में भाजपा की चुनाव तैयारियों की कमान संभाल रहे प्रदेश प्रभारी अमित शाह जमीनी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं।
पर इसके लिए वह पूरी सच्चाई भी जान लेना चाहते हैं। जिससे चुनावी लिहाज से संगठन को जल्द से जल्द चाकचौबंद कर दिया जाए।
पहले प्रदेश संगठन और फिर क्षेत्रों के संगठन का हालचाल ले चुके शाह पहले ही कह चुके हैं कि पार्टी के लोग लोकसभा सीट जिताने की चिंता छोड़ सिर्फ अपना बूथ जिताने की चिंता करें।
लोकसभा सीट अपने आप जीत जाएगी। शाह 30 जुलाई को फिर लखनऊ आ रहे हैं। इस बार उनका एजेंडा यूपी में अपनी कार्ययोजना पर हुए काम की सच्चाई जानना है।
इस लिहाज से अमित शाह की यह यात्रा भाजपाइयों के लिए कड़ा इम्तिहान बन सकती है।
पार्टी के लोगों की मानें तो क्षेत्रीय दौरे और प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक में शाह के रुख से यह साफ हो चुका है कि वह प्रदेश में संगठन की जमीनी पकड़ की सच्चाई से अनजान नहीं है।
यही बात भाजपाइयों को ज्यादा परेशान कर रही हैं। हालांकि पहले चरण में 30 जुलाई को वह संगठन मंत्रियों के साथ ही बैठक करने वाले हैं।
पर, नीचे से लेकर ऊपर तक के नेता व कार्यकर्ता संगठन मंत्रियों की रिपोर्ट को लेकर परेशान हैं।
वे आशंकित है कि यह रिपोर्ट और उसके बाद शाह के साथ होने वाले संगठन मंत्रियों के सवाल व जवाब उनके लिए मुसीबत न बन जाएं।
बूथ कमेटियों पर होगी पूछताछ
शाह ने पिछले दौरे में सभी जगह पार्टी नेताओं व कार्यकर्ताओं पर 31 जुलाई तक बूथ कमेटियां गठित कर लेने की जिम्मेदारी सौंपी थी। इस बार सबसे पहला इम्तिहान बूथ कमेटियों पर ही होगा।
इसके लिए संगठन मंत्रियों को एक प्रोफार्मा भेजकर उसे भरकर लाने को कहा गया है। प्रोफार्मा में स्थान, मतदान केंद्र का नाम व बूथ संख्या, बूथ कमेटी प्रभारी के नाम व फोन नंबर की जानकारी भरकर लाने को कहा गया है।
जानकारी के मुुताबिक गुजरात की तर्ज पर बूथों के प्रबंधन पर जोर दे रहे शाह खुद बूथ कमेटियों के प्रभारियों में से किसी न किसी से समय-समय पर बात करके फीडबैक लेंगे।
संगठन के ढांचे पर भी होगी पूछताछ
बूथ कमेटियों के अलावा दूसरी परीक्षा संगठनात्मक ढांचे पर होगी। संगठन मंत्रियों से उनके कार्यक्षेत्र में आने वाले जिलों में पार्टी के मुख्य संगठन सहित मोर्चा व प्रकोष्ठों के संगठनों के बारे में भी जानकारी ली जाएगी।
संगठन मंत्रियों के इस बारे में भी निर्देश दिए चुके हैं। बूथ कमेटियों की ही तरह संगठनात्मक ढांचे को खड़ा करने का काम भी 31 जुलाई तक पूरा करने की जिम्मेदारी प्रदेश भाजपा को सौंपी गई थी। शाह इस सिलसिले में भी पूछताछ करेंगे।
क्षेत्रीय स्थितियों पर भी ली जाएगी जानकारी
बैठक में भाग लेने वाले संगठन मंत्रियों से उनके यहां आने वाली लोकसभा सीटों की सामाजिक व राजनीतिक स्थिति के बारे में भी जानकारी जुटाई जाएगी।
उदाहरण के लिए लोकसभा की किस सीट पर जातीय समीकरण की स्थिति कैसी है? संसदीय क्षेत्रों के परिसीमन के बाद 2009 में हुए लोकसभा चुनाव में संबंधित स्थान पर जीत में किन समीकरणों से प्रमुख भूमिका निभाई थी?
आज उन सीटों पर भाजपा का प्रमुख रूप से किस दल के उम्मीदवार से मुकाबला हो सकता है। किन समीकरणों पर काम करने से भाजपा को जीत मिल सकती है? इस सिलसिले में भी पूछताछ की जाएगी।