सूबे के सभी थानों में इंस्पेक्टरों को इंचार्ज बनाने के आदेश ने जिले के कई अफसरों की पेशानी पर बल डाल दिए हैं।
महत्वपूर्ण और मलाईदार थानों में अपने करीबियों को तैनात कराने वाले अफसर अब इस जद्दोजहद में हैं कि कैसे अपनों को बचाएं? अपनों के मलाईदार पोस्टिंग से अफसरों का भी भला जुड़ा है।
इसलिए शासनादेश के बावजूद अभी तक जिलों के थानों में इंस्पेक्टरों की तैनाती नहीं की गई है। दरअसल थानों में बने रहने को बड़े स्तर पर जोड़तोड़ जारी है।
इसकी वजह है सूबे के ज्यादातर थानों की कमान इस समय जाति विशेष या सरकार के करीबियों के हाथ में है। अगर शासनादेश का पालन करते हैं तो अपने रूठ जाएंगे।
जिले के अफसरों ने भी ऊपर के लोगों को कुछ ऐसा ही बताकर डरा रखा है कि लोकसभा चुनाव करीब हैं नुकसान हो जाएगा। कायदे-कानून कुछ भी बना लो, होगा तो वही जो अफसर चाहेंगे।