केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि पुलिस को अब नो एक्शन व एक्सट्रीम एक्शन की जगह जस्ट एक्शन की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। केंद्र की मोदी सरकार ने देश में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने व अपराधियों की दोष सिद्धि की दर को आगे बढ़ाने के लिए बहुत काम किया है। उन्होंने कहा कि देश में जिन अपराधों में छह साल से अधिक की सजा का प्रावधान है उनमें एफएसएल जांच रिपोर्ट को अनिवार्य कर दोषी सिद्धि की दर बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
यूपी स्टेट इंस्टीट्यूट फॉर फोरेंसिक साइंसेज के शिलान्यास समारोह में शाह ने कहा कि पुलिस नो एक्शन व एक्सट्रीम एक्शन के कारण ही बदनाम होती है। ये दोनों ठीक नहीं है। इनमें प्रतिक्रिया अधिक होती है। शाह ने कहा कि 2024 तक देश के आधे से अधिक राज्यों में फोरेंसिक साइंस महाविद्यालय स्थापित हो जाएंगे। यूपी में इस इंस्टीट्यूट के शुरू होने के बाद हर जिले में मोबाइल फोरेंसिक वाहन और रीजनल एफएसएल सेंटर स्थापित किए जाएंगे। राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के जरिये भी रक्षा महाविद्यालयों की स्थापना का प्रयास किया जा रहा है। इससे प्रशिक्षित मानव सुरक्षा बल मिलेगा।
उन्होंने कहा कि यूपी फोरेंसिक इंस्टीट्यूट में बच्चे न केवल अपना कॅरिअर बनाएंगे बल्कि अनुसंधान में हिस्सा लेकर देश की कानून व्यवस्था की रीढ़ बनने का काम करेंगे। उन्होंने कहा कि इंस्टीट्यूट में 15 करोड़ की लागत से देश का आधुनिक एवं सर्वोच्च डीएनए केंद्र भी बनेगा। जिस प्रकार जाली नोट, नार्कोटिक्स अपराध, हथियार तस्करी, गौ तस्करी सहित अन्य अपराध बढ़ रहे हैं उनसे निपटने के लिए पुलिस को वैज्ञानिक व आधुनिक दृष्टिकोण से मजबूत बनाना आवश्यक है।
शाह ने कहा कि प्रोफेशनल शिक्षा के अभाव में भारत में अपराधियों की दोष सिद्धि का ग्राफ काफी नीचे है, जबकि इस्राइल में यह 90 प्रतिशत है। फोरेंसिक संस्थान वैज्ञानिक आधार पर गुनाहगारों को दोष सिद्ध करने में न्यायपालिका की मदद करेंगे। समारोह में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, डॉ. दिनेश शर्मा, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह, राज्यमंत्री स्वाति सिंह और फोरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी गांधीनगर के कुलपति डॉ. जेएम व्यास मौजूद थे।
दो माह में शुरू होगा इंस्टीट्यूट का निर्माण कार्य
अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी ने धन्यवाद भाषण में गृहमंत्री को विश्वास दिलाया कि यूपी पुलिस जस्ट एक्शन की दिशा में काम करेगी। उन्होंने कहा कि फोरेंसिक इंस्टीट्यूट का निर्माण दो महीने में शुरू कर दिया जाएगा और इंस्टीट्यूट तय समय से काम करना शुरू कर देगा।