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मास्टर माइंड लेखाकार सहित सात गिरफर, हड़पे थे स्मारक समिति के कई करोड़

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लखनऊ। स्मारक समिति के 6500 कर्मचारियों के पीएफ से 10 करोड़ रुपये के गबन का खुलासा गोमतीनगर पुलिस ने किया है। इस घपले की साजिश स्मारक समिति के लेखाकार संजय सिंह ने ही रची थी। मास्टरमाइंड लेखाकार समेत सात जालसाजों को सहारा ओवरब्रिज के पास से रविवार देर रात गिरफ्तार किया गया। उसने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर रकम हड़पने की साजिश रची थी। इस मामले में पुलिस अभी कई लोगों की तलाश कर रही है।
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एसीपी गोमतीनगर श्वेता श्रीवास्तव के मुताबिक, स्मारक संग्रहालयों, संस्थानों, पार्कों और उपवनों की प्रबंध समिति का संचालन लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा किया जाता है। 16 सितंबर 2021 को एलडीए के सचिव पवन गंगवार ने गोमतीनगर थाने में केस दर्ज कराकर आरोप लगाया था कि स्मारक समिति के कर्मचारियों के एफडी कराए गए धन से 10 करोड़ रुपये का हेरफेर किया गया है। इस मामले में सचिव ने दो लोगों को आरोपी बनाया। पुलिस की विवेचना में स्मारक समिति के लेखाकार विशालखंड गोमतीनगर निवासी संजय सिंह, चंद्रलोक कॉलोनी अलीगंज निवासी रविकांत पांडेय उर्फ मुकेश पांडेय, केरल के कैलूर अर्नाकुलम निवासी संदीप पुथनमाडम, कर्नाटक मैसूर हैबबाल निवासी दीपक यादवा, हरदोई के महेशपुर निवासी शैलेंद्र सिंह उर्फ शैलू, देवरिया के रामपुर कारखाना का रहने वाला आकाश कार्तिकेय और गोंडा के स्टेशन रोड निवासी कृष्णमोहन श्रीवास्तव शामिल थे। पुलिस ने इन सभी आरोपियों की रविवार देर रात गिरफ्तारी दिखाई है।
प्रभारी निरीक्षक केशव कुमार तिवारी के मुताबिक, इस फर्जीवाड़े की साजिश स्मारक समिति में बतौर लेखाकार तैनात संजय सिंह ने रची थी। संजय मूलरूप से अयोध्या के नाका मुजफ्फरा का रहने वाला है। संजय ने एलडीए के एक ब्रोकर शैलेंद्र उर्फ शैलू से बताया कि 276 करोड़ रुपये जो कर्मचारियों का है। उसे बैंक में एफडी के रूप में निवेश करना है। इसकी जानकारी शैलेंद्र ने अपने साथी संदीप पी और रविकांत उर्फ मुकेश पांडेय को दी। संदीप पी ने मुकेश व दीपक यादव के साथ मिलकर बैंक ऑफ बड़ौदा के रोशनाबाद शाखा के प्रबंधक नागेंद्र पाल से मुलाकात की। उनसे एफडी के बारे में बात किया था। इस रकम को हड़पने के लिए संदीप ने दीपक, शैलेंद्र, मुकेश, आकाश, कृृष्णमोहन उर्फ निक्कू के साथ मिलकर साजिश रची। इस साजिश की पूरी जानकारी लेेखाकार संजय सिंह को थी। सातों ने मिलकर साजिश रची और इसके बाद फर्जी दस्तावेज तैयार कर बैंक में खाता खुलवाया जिसमें एक साथ 48 करोड़ रुपये जमा करा दिए।
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आरोपियों के पास से बरामदगी
इंस्पेक्टर गोमतीनगर केशव कुमार तिवारी के मुताबिक, जालसाजों के पास से पांच चेक कोटक महिंद्रा बैंक, एक नियुक्ति पत्र राइट पे सर्विस प्रा. लि., एक रसीद गोल्ड पर्चेज राइट पे सर्विस, तीन लग्जरी कार बरामद की गई हैं। इसके अलावा कई अन्य दस्तावेज बरामद हुए हैं। आरोपियों के पास से दर्जनभर मोबाइल भी मिले हैं।
बैंक में रुपये जाने के पांच दिन बाद खुला खाता
पुलिस के मुताबिक, जालसाजों ने हजरतगंज के पीएनबी में जमा कर्मचारियों के पीएफ का 48 करोड़ रुपये 31 मार्च 2021 को बैंक ऑफ बड़ौदा में जमा कराया। इसके पांच दिन बाद बैंक मैनेजर नागेंद्र पाल स्मारक समिति गए जहां पर संजय सिंह के साथ छह अन्य आरोपी मिले। संजय ने संदीप पी और कृष्णमोहन श्रीवास्तव का सहायक लेखाकार के रूप में बैंक मैनेजर से परिचय कराया। इसके बाद इस गिरोह ने फर्जी दस्तावेजों को बैंक मैनेजर को सौंप दिया। इसी आधार पर बैंक मैनेजर ने खाता खोल दिया और रुपये इस बचत खाते में जमा हो गए। सभी ने मिलकर रुपये के बंदरबांट शुरू कर राइट पे कंपनी के खाते में ट्रांसफर करा दिए। पुलिस के मुताबिक, इस मामले में अभी राइट पे कंपनी केअधिकारियों व कर्मचारियों की तलाश की जा रही है। वहीं स्मारक समिति के कई अन्य कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। उनकी भी कुंडली खंगाली जा रही है।
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