हवाई जहाज में इस्तेमाल होेने जाने वाले एविएशन टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) की चोरी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए कमिश्नरेट पुलिस ने सात शातिरों को दबोचा। पुलिस के मुताबिक एयरपोर्ट पर ही सक्रिय रहने वाला यह गिरोह विमानों में भरने के लिए आने वाला एटीएफ रिफलिंग के दौरान चुराकर दूसरे टैंकर में जमा करता था। बंथरा पुलिस व आपूर्ति विभाग की संयुक्त कार्रवाई में इनके पास से 8500 लीटर एटीएफ, टैंकर व लग्जरी कार बरामद की गई। वहीं, बरामद एटीएफ की बाजार में लाखों की कीमत बताई जा रही है।
डीसीपी मध्य अपर्णा रजत कौशिक के मुताबिक प्रभारी निरीक्षक बंथरा अजय प्रताप सिंह व खाद्य आपूर्ति निरीक्षक सरोजनीनगर की संयुक्त टीम को अमावां जंगल में दबिश के दौरान एक टैंकर मिला, जिसमें 8500 लीटर एटीएफ मिला। इस दौरान हरदोई के संडीला के अहिरावां का रमेश, मड़ियांव मुदक्कीपुर का अजहर अली, पारा के बजरंग विहार तार वाली बगिया का अंकित साहू, जानकीपुरम के सेक्टर-8 का वकील अहमद, सरोजनीनगर हिंदू खेड़ा का मुकेश, चिल्लावां लोधन टोला का अविनाश कुमार और पारा के सरोसा निवासी राहुल कुमार रावत पकड़ में आए। मौके से लग्जरी कार, आठ मोबाइल, 8800 रुपये भी बरामद हुए। पुलिस के मुताबिक एटीएफ की कीमत करीब 128 रुपये लीटर है, जिसे गिरोह 70-80 रुपये में बेचता था। पुलिस ने आपूर्ति विभाग की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया है। आरोपियों को कोर्ट के सामने पेश कर जेल भेज दिया गया।
डीजल-पेट्रोल इंजन में इस्तेमाल नहीं होता एटीएफ
एविएशन टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) परिष्कृत केरोसिन तेल होता है। इसका इस्तेमाल विमानों के संचालन में होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि एटीएफ को अन्य साधारण डीजल व पेट्रोल इंजन में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। ऐसा करने पर इंजन में खराबी आ सकती है। एटीएफ की कीमत 120 से 130 रुपये प्रति लीटर तक होती हैै।
फ्लाइंग स्कूलों में सप्लाई की आशंका
एटीएफ की चोरी के बाद इसके इस्तेमाल को लेकर छानबीन चल रही है। आशंका जताई जा रही है कि इसकी सप्लाई फ्लाइंग स्कूलों में की जाती थी। हालांकि, इसकी पुष्टि पड़ताल के बाद ही होगी। यूपी में कानपुर, गाजियाबाद, मेरठ, अलीगढ़, वाराणसी, नोएडा आदि में फ्लाइंग स्कूल हैं, जहां प्रशिक्षण दिया जाता है।
गिरोह के अन्य बदमाशों की तलाश जारी
प्रभारी निरीक्षक बंथरा के पूछताछ में गिरोह के कई और बदमाशों के नाम सामने आए हैं। इनकी तलाश जारी है। पता किया जा रहा है कि गिरोह कबसे यह काम कर रहा था। आरोपियों के मोबाइल फोन से कुछ संदिग्ध नंबर भी मिले हैं, जिन पर उनकी अक्सर बातें होती थी। इनमें से कई नंबर गैर जनपद के हैं। पता लगाया जा रहा है कि गिरोह चुराया गया एटीएफ किसे बेचता था।