यूपी पावर कॉर्पोरेशन लि. (यूपीपीसीएल) के पीएफ घोटाला मामले में गिरफ्तार सात आरोपियों को शनिवार को 20 दिसंबर तक न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। वहीं, भ्रष्टाचार निवारण के विशेष न्यायाधीश संदीप गुप्ता ने पूर्व वित्त निदेशक सुधांशु द्विवेदी की जमानत अर्जी को खारिज कर दिया।
इससे पहले जांच एजेंसी ईओडब्ल्यू ने डीएचएफ एल के तत्कालीन रीजनल मैनेजर अमित प्रकाश, फर्जी ब्रोकर फर्म के संचालक मनोज कुमार अग्रवाल, विकास चावला, संजय कुमार, अरुण जैन व पंकज गिरी उर्फ निशु और चार्टर्ड अकाउंटेंट श्याम अग्रवाल को गिरफ्तार करके विशेष न्यायाधीश संदीप गुप्ता की अदालत में पेश किया। कोर्ट ने सभी को न्यायिक हिरासत में लेकर जेल भेजने का आदेश दिया।
वहीं, कोर्ट में विकास चावला और पूर्व में जेल भेजे गए प्रवीण कुमार की ओर से जेल में उनका इलाज कराने की मांग वाली अर्जी दी गई। इस पर कोर्ट ने जेल अधीक्षक को नियमानुसार कार्यवाही करने का आदेश दिया। बाद में सुधांशु द्विवेदी की ओर से घर में शादी की जानकारी देकर अंतरिम जमानत की मांग की गई।
इस पर कोर्ट ने कहा, नियमित जमानत की अर्जी भी दी गई है। लिहाजा अंतरिम जमानत अर्जी की जगह नियमित जमानत अर्जी को ही सुना जाएगा। द्विवेदी के वकील ने उन्हें निर्दोष बताते हुए कहा कि जिस बैठक में निवेश का प्रस्ताव पारित किया गया, उसमें प्रमुख सचिव संजय अग्रवाल भी शामिल थे। मगर उनके प्रभाव के चलते उन्हें आरोपी नहीं बनाया गया है।
वहीं, अभियोजन के विशेष अधिवक्ता अनिल प्रताप सिंह ने जमानत अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए कर्मचारियों के पीएफ के धन का मनमाने ढंग से निवेश कर घोटाला किया है। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद जमानत अर्जी को खारिज कर दिया।