यूपी सरकार के खिलाफ बागी तेवर अपनाने वाले वरिष्ठ आईएएस अफसर सूर्य प्रताप सिंह ने स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति (वीआरएस) मांग ली है। उन्होंने बृहस्पतिवार को मुख्य सचिव आलोक रंजन को वीआरएस के लिए सात पन्ने का लंबा पत्र लिखकर स्वीकृति मांगी है।
सिंह ने कहा है कि यूपी में अब निष्ठा से काम करना हर किसी के बस की बात नहीं है। लिहाजा मुझे अब शांति से सेवा निवृत्त होने का मन है। उन्होंने कहा कि जिस सेवा को पाने के लिए वर्षों तपस्या करनी पड़ती है, उससे वीआरएस लेने का फैसला मेरी जिंदगी का खास दिन है।
1982 बैच के आईएएस अफसर सूर्य प्रताप सिंह ने पत्र में सरकार और नेताओं पर तीखी टिप्पणियां की हैं। उन्होंने लिखा है कि यूपी का आज का राजनीतिक और प्रशासनिक परिवेश ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ से अलग ‘निजी हिताय, निजी सुखाय’ की ओर जाता लग रहा है। यह लोकतंत्र के लिए घातक है।
सिंह का कहना है कि लोहिया ने कहा था- जिंदा कौमें पांच साल इंतजार नहीं करतीं, परंतु यूपी की जनता कई सालों से यहां यही सहने के लिए विवश है... कुपित है.. आक्रोशित है...। परंतु कुटिल जातिवादी, परिवारवादी छद्मनिरपेक्ष व्यवस्था न उसे जीने देती है, न मरने।
आत्महत्या करके भी यहां कुछ नहीं मिलता। ओलावृष्टि के दौरान किसानों ने आत्महत्याएं कीं, परिवारीजन रोये, चिल्लाए पर किसी का मन नहीं पसीजा... पूरा मुआवजा आज तक नहीं मिला।
लोग डरते हैं, विरोध किया तो जलाकर न मार डालें
सिंह ने पत्र में लिखा, विरोध करने वालों को डर है कि कहीं जलाकर न मार डालें क्योंकि आज के यूपी में सबक सिखाने का यही नया चलन है, नई न्यायिक व्यवस्था है। यहां कोर्ट कचहरी की जरूरत नहीं... विरोध की सजा की नई परिभाषा लिखी गई है।
यहां पढ़ें सात पन्नों की पूरी चिट्ठी
हमारे प्यारे उत्तर प्रदेश... क्या उत्तम प्रदेश की ओर अग्रसर है। या वोट बैंक की तुष्टिकरण के वशीभूत... बेपरवाह प्रशासनिक व्यवस्था, खाली खजाना, बिगड़ती कानून व्यवस्था... यौनाचार से चीखती महिला-बच्चों की चीत्कार... जलाकर मारने की नई क्रूर दंड व्यवस्था... जातिवाद, क्षेत्रवाद, धर्मवाद, छद्मवाद ने क्या इसे उल्टा प्रदेश नहीं बना दिया है।
सरकार के खिलाफ सोशल साइट्स पर खोल रखा था मोर्चा
सूर्यप्रताप काफी दिनों से सोशल साइट पर सरकार के कामकाज पर टिप्पणी कर रहे थे। वे सार्वजनिक उद्यम विभाग में प्रमुख सचिव हैं। कभी आयोग तो कभी किसी अन्य संस्था पर निशाना साधकर उन्होंने मोर्चा खोल रखा है। लोकसेवा आयोग के खिलाफ प्रदर्शन में भी वे शामिल हो चुके हैं। हाल ही में उन्होंने यूपी में बेमौसम बारिश को लेकर कड़ी टिप्पणी की थी।