भाजपा के पिछड़े व दलित वर्ग के नेताओं को उनके जनाधार की कसौटी पर कसने का फैसला किया गया है। इसके लिए इन नेताओं को महासंपर्क अभियान के दौरान विशेष सदस्यता अभियान और सक्रिय सदस्यता की जिम्मेदारी देकर लक्ष्य तय होंगे। नेताओं को तय समय में पिछड़े व दलित वर्ग के लोगों के बीच जाकर उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलानी होगी।
इस इम्तिहान में पास न होने वाले नेताओं के लिए भविष्य में पार्टी में पद-प्रतिष्ठा पाना कठिन होगा। तय किया गया है कि पार्टी में इन वर्गों के नेताओं को अपनी जातियों के बीच भेजा जाए और उन्हें सक्रिय सदस्य बनाने की जिम्मेदारी सौंपी जाए।
ऐसे होगी परीक्षा
इन वर्गों के नेताओं को सक्रिय सदस्य बनाने के दौरान नए व पुरानों का वर्गीकरण कर ब्यौरा तैयार करना होगा। यह काम आसान नहीं। कारण, सक्रिय सदस्य वही बन सकता है जिसने सौ लोगों को प्राथमिक सदस्य बनाया है।
स्वाभाविक है कि प्रदेश स्तर पर इन वर्गों के चेहरे के तौर पर संगठन से लेकर चुनावी राजनीति तक निर्णायक भूमिका में रहने वाले नेताओं को अगर 10 भी नए सक्रिय सदस्य बनाने हुए तो उन्हें कम से कम एक हजार प्राथमिक सदस्यों की जरूरत होगी।
यह बहुत आसान काम नहीं लगता। खासतौर से उन चेहरों के लिए जिन्होंने प्राथमिक सदस्यता अभियान के दौरान प्राथमिक सदस्यता कराने पर बहुत ध्यान नहीं दिया है।