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लखनऊ विश्वविद्यालय में नहीं चल रहे सेल्फ फाइनेंस कोर्स, कारण तलाशेंगे वीसी

Wed, 21 Aug 2019 04:03 PM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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lucknow university - फोटो : amar ujala
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लखनऊ विश्वविद्यालय में साल दर साल बंद हो रहे सेल्फ फाइनेंस कोर्सों को लेकर विवि की कार्य परिषद ने चिंता जाहिर की है। विवि में मंगलवार को हुई कार्य परिषद की बैठक में सदस्यों ने यह मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि पूरी दुनिया में सेल्फ फाइनेंस पाठ्यक्रम नये कलेवर के साथ संचालित हो रहे हैं।
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वहीं लविवि में ये लगातार बंद होते जा रहे हैं, इसलिए कुलपति अपने विभागाध्यक्ष तथा स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रम समन्वयकों की बैठक बुलाएं। इसके कारण तलाशकर रिपोर्ट बनाई जाए। अगली कार्य परिषद में यह रिपोर्ट रखी जाएगी।

कार्य परिषद सदस्य अनिल सिंह ने स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों का मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि अभी तक विवि ने इस पर ध्यान क्यों नहीं दिया। इसके मुख्य कारण- फैकल्टी अच्छी न होना, संचालन के नियमों में कमी, सिलेबस का अपडेट न होना, प्लेसमेंट न होना आदि हो सकते हैं। इन पर चर्चा होनी चाहिए और इसके बाद इनका समाधान तलाशा जाना चाहिए। ऐसा न होने की वजह से कोर्स बंद होते जा रहे हैं और विवि इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। 
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इस साल 30 से ज्यादा पाठ्यक्रमों पर लगा ताला

लविवि में इस साल 30 से अधिक स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों पर ताला लग गया है। सेल्फ फाइनेंस वाले 17 डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के लिए तो विवि ने इस साल आवेदन ही नहीं मांगे थे। डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के अलावा डिग्री पाठ्यक्रमों में सोशल वर्क सेल्फ फाइनेंस, पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन सेल्फ फाइनेंस, एमएससी प्लांट साइंस, एमएससी टोटल क्वालिटी मैनेजमेंट, एमए डिफेंस स्टडीज, एमए होमसाइंस, एमएससी रिन्यूएबल एनर्जी, एमएससी इलेक्ट्रॉनिक्स और एमएससी फॉर्मास्यूटिकल केमिस्ट्री जैसे पाठ्यक्रम इस साल संचालित नहीं हो पाए हैं।

इन पाठ्यकमों में कुल सीट के मुकाबले 60 फीसदी दाखिले नहीं हो पाए थे। लविवि ने सेल्फ फाइनेंस पाठ्यक्रमों के संबंध में नियम इसी साल बदले हैं। पिछले साल तक कुल सीटों के मुकाबले 40 फीसदी सीटें भरने पर कोर्स का संचालन किया जाता था। मगर इस साल यह नियम 60 फीसदी का हो गया है। कई कोर्स तो केवल इसी वजह से बंद हो गए हैं।

नये कुलपति चयन के लिए प्रो. डीपी सिंह करेंगे प्रतिनिधित्व
लविवि कुलपति प्रो. एसपी सिंह का कार्यकाल नवंबर में समाप्त होना है। कार्य परिषद बैठक में नये कुलपति के चयन के लिए सर्च कमेटी गठित करने का फैसला किया गया। लविवि केपूर्व कुलपति प्रो. डीपी सिंह को कार्य परिषद ने सर्च कमेटी के सदस्य के लिए नामित किया है।

भृगु प्रकाश मेमोरियल अवॉर्ड पर मुहर

मनोविज्ञान विभाग की प्रो. मधुरिमा प्रधान की ओर नया अवॉर्ड देने का प्रस्ताव कार्य परिषद ने मंजूर कर लिया है। उन्होंने अपने पिता की स्मृति में स्व. भृगु प्रकाश मेमोरियल अवॉर्ड शुरू करने का प्रस्ताव दिया है। पॉजीटिव सायकोलॉजी प्रश्नपत्र में सबसे ज्यादा नंबर लाने वाले विद्यार्थी को यह अवॉर्ड दिया जाएगा।

परीक्षा कार्य सुधार समिति की बागडोर प्रो. आरएन सिंह को
लविवि कार्य परिषद ने परीक्षा कार्य सुधार समिति की बागडोर प्रो. आरएन सिंह को देने का फैसला किया है। पिछली कार्य परिषद में इसके लिए समिति का गठन करने की बात कही गई थी। कार्य परिषद से प्रस्ताव पास होने के तीन महीने बाद कार्य परिषद सदस्य प्रो. एसके द्विवेदी को अध्यक्ष के लिए पत्र गया था। इस पर उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए अपना इस्तीफा दे दिया था। इस बार प्रो. आरएन सिंह को इसका अध्यक्ष तथा प्रो. एसके द्विवेदी तथा प्रो.चमन मेहरोत्रा को सदस्य बनाने पर सहमति बनी। यह समिति दो महीने में अपनी रिपोर्ट देगी।
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हर दो महीने में हो कार्य परिषद की बैठक

कार्य परिषद में एक बार फिर से हर दो महीने में बैठक न होने का मुद्दा उठाया गया। सदस्यों का कहना था कि लविवि की परिनियमावली के अनुसार हर दो महीने में कार्य परिषद की बैठक कम से कम एक बार होनी जरूरी है। पिछली कार्य परिषद में इस पर चर्चा के बाद सहमति भी बनी थी। इसके बावजूद इसका पालन नहीं किया जा रहा है।

सिलेबस और नये पाठ्यक्रमों को मंजूरी
कार्य परिषद की बैठक में 50 से ज्यादा महाविद्यालयों में 80 से ज्यादा पाठ्यक्रम संचालित करने पर कार्य परिषद ने अपनी मुहर लगा दी है। इसके साथ ही एकेडमिक काउंसिल से पास किए गए विभिन्न विभागों के नये सिलेबस भी कार्य परिषद से पास हो गए। बैठक में इसके साथ ही कई शिक्षकों की छुट्टी, स्थायीकरण और इंजीनियरिंग संकाय में नई भर्ती को भी मंजूरी मिल गई। लविवि में न्यू लॉ बिल्डिंग का नाम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम करने पर भी सहमति बन गई है।
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