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खौफनाक: यूपी में हर रोज हो रहे 11 से ज्यादा कत्ल

Wed, 17 Jun 2015 01:46 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,लखनऊ
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सूबे में रोजाना 11 से ज्यादा कत्ल हो रहे हैं। 13-14 बलवा की घटनाएं हो रही हैं। रोजाना नौ से दस लूट की वारदातें हो रही हैं। यह आंकड़े किसी और के नहीं खुद पुलिस के हैं। पुलिस ने 1 जनवरी से 30 अप्रैल यानी 120 दिन में हुए अपराधों का जो ब्यौरा पेश किया है, वह बताता है कि सूबे में कानून व्यवस्था के हालात दुरुस्त नहीं हैं। पर आला अफसरों का दावा है कि अपराधों में कमी आई है। कानून-व्यवस्था नियंत्रण में है।
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प्रदेश में संगीन अपराध नहीं थम पा रहे हैं। अफसरों ने इसका तोड़ निकाल लिया है। अफसरों का रटा-रटाया जवाब होता है-‘पिछले साल इसी अवधि के सापेक्ष इस वर्ष अपराध कम हुए हैं।’

आंकड़े किसी मामले में ऊपर या नीचे होते रहते हैं। रटा-रटाया जवाब चलता रहता है कि फला संगीन मामले में हमने नियंत्रण पाया। बहरहाल इस बार भी अफसरों का यही दावा है। अफसरों के मुताबिक इस साल पिछले वर्षों की अपेक्षा अपराधों में कमी आई है।
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जबकि संगीन वारदात के अलावा अन्य अपराधों में जो मुकदमे दर्ज हुए वे पिछले दो वर्षों के इसी दौरान यानी 1 जनवरी से 30 अप्रैल तक दर्ज हुए मुकदमों के मुकाबिले कहीं अधिक है। इस वर्ष के शुरुआती चार महीनों में आईपीसी की विभिन्न धाराओं में 68,650 अभियोग दर्ज हो चुके हैं। यह आंकड़ा गत वर्ष इसी अवधि में दर्ज मुकदमों से तकरीबन दो हजार ज्यादा है।
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ये आंकडे़ खुद कह देते हैं कहानी

हत्या--1395
चोरी-नकबजनी--1959
लूट--992
बलात्कार--849
दहेज हत्या--634
डकैती--93
फिरौती के लिए अपहरण--14
(पुलिस में दर्ज ये वारदातें 1 जनवरी से 30 अप्रैल तक की)

हकीकत यह भी
संगीन अपराधों के अलावा जिलों में समय-समय पर कानून-व्यवस्था की स्थिति संवेदनशील होती रही। कई सनसनीखेज मामलों में राजनेताओं के नाम सामने आए तो पुलिसकर्मियों और अफसरों पर भी रिश्वत का रेट तय करने जैसे आरोप लगे। पीएसी व आरएएफ के दम पर कानून-व्यवस्था को संभालने के बाद आला अफसर बड़ों के मामले में डिफेंसिव बने रहे।

तीन-तीन पूर्व डीजीपी के विभाग में ट्रांसफर व पोस्टिंग के लिए घूस के रेट तय करने के मामले ने जब तूल पकड़ा तो सीधी कार्रवाई के बजाय जांच बैठा दी गई। ऐसे ही जहां राजनेताओं की संलिप्तता सामने आई तो वहां भी जांच का बहाना बनाकर मामले को पेंडिंग लिस्ट में डाल दिया गया।

मामले पर आईजी कानून-व्यवस्‍‌था ए सतीश गणेश कहते हैं,‘संगीन वारदातों में पिछले दो सालों की अपेक्षा में इस साल कमी आई है। पिछले वर्ष इस अवधि में हत्या की 1618, लूट के 1039, डकैती के 82 व बलवे के 1647 मुकदमे दर्ज हुए थे। जो इस वर्ष दर्ज हुए मामलों से कहीं अधिक हैं। अपराधों की रोकथाम के साथ ही संगीन वारदातों के शीघ्र खुलासे व दोषियों को गिरफ्तारी पर जोर दिया जा रहा है।’
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