सूबे में रोजाना 11 से ज्यादा कत्ल हो रहे हैं। 13-14 बलवा की घटनाएं हो रही हैं। रोजाना नौ से दस लूट की वारदातें हो रही हैं। यह आंकड़े किसी और के नहीं खुद पुलिस के हैं। पुलिस ने 1 जनवरी से 30 अप्रैल यानी 120 दिन में हुए अपराधों का जो ब्यौरा पेश किया है, वह बताता है कि सूबे में कानून व्यवस्था के हालात दुरुस्त नहीं हैं। पर आला अफसरों का दावा है कि अपराधों में कमी आई है। कानून-व्यवस्था नियंत्रण में है।
प्रदेश में संगीन अपराध नहीं थम पा रहे हैं। अफसरों ने इसका तोड़ निकाल लिया है। अफसरों का रटा-रटाया जवाब होता है-‘पिछले साल इसी अवधि के सापेक्ष इस वर्ष अपराध कम हुए हैं।’
आंकड़े किसी मामले में ऊपर या नीचे होते रहते हैं। रटा-रटाया जवाब चलता रहता है कि फला संगीन मामले में हमने नियंत्रण पाया। बहरहाल इस बार भी अफसरों का यही दावा है। अफसरों के मुताबिक इस साल पिछले वर्षों की अपेक्षा अपराधों में कमी आई है।
जबकि संगीन वारदात के अलावा अन्य अपराधों में जो मुकदमे दर्ज हुए वे पिछले दो वर्षों के इसी दौरान यानी 1 जनवरी से 30 अप्रैल तक दर्ज हुए मुकदमों के मुकाबिले कहीं अधिक है। इस वर्ष के शुरुआती चार महीनों में आईपीसी की विभिन्न धाराओं में 68,650 अभियोग दर्ज हो चुके हैं। यह आंकड़ा गत वर्ष इसी अवधि में दर्ज मुकदमों से तकरीबन दो हजार ज्यादा है।