स्वास्थ्य महानिदेशालय डेढ़ महीने बाद बुधवार को फिर आग की लपटों में घिर गया। इस बार आग महानिदेशक डॉ. विजयलक्ष्मी के कैंप ऑफिस में लगी। उनके सभाकक्ष से शुरू हुई आग ने मुख्य कार्यालय, स्टाफ ऑफिसर व पीए के कमरे को भी अपनी चपेट में ले लिया। लगभग दो घंटे की मशक्कत के बाद फायर बिग्रेड की छह गाड़ियों ने आग पर काबू पाया।
आग से महानिदेशक के कमरे में रखीं कई महत्वपूर्ण फाइलें और कम्प्यूटर जल गए। नुकसान का आकलन देर शाम तक नहीं किया जा सका था। 14 जून को भी यहां आग लगने से कई महत्वपूर्ण फाइलें जल गई थीं। 50 दिन के भीतर यहां दोबारा आग लगने से साजिश की आशंका जताई जा रही है।
कैसरबाग क्षेत्र में हाईकोर्ट के पास स्थित स्वास्थ्य महानिदेशालय में सुबह सफाई कार्य चल रहा था। लगभग 9.15 बजे सफाईकर्मी ने महानिदेशक कार्यालय से धुआं उठता देखा और गार्डों को जानकारी दी। कुछ ही मिनटों में ऑफिस आग की लपटों से घिर गया।
कर्मचारी फायर ब्रिगेड और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को सूचना देने के साथ आग बुझाने की कोशिश में जुट गए। एक के बाद दमकल की छह गाड़ियों ने किसी तरह दो घंटे में आग पर काबू पाया।
वुडेन वर्क के कारण तेजी से फैली आग
महानिदेशक डॉ. विजयलक्ष्मी के कार्यालय में आग का कारण प्रथम दृष्टया शार्ट सर्किट माना जा रहा है। हालांकि शार्ट सर्किट किस उपकरण से हुआ ये अभी जांच का विषय है। माना जा रहा है कि महानिदेशक के कार्यालय में वुडेन वर्क होने से आग तेजी से फैली।
मीटिंग हॉल, मुख्य कार्यालय, स्टाफ ऑफिसर के कमरे सभी जगह वुडेन वर्क ही था, इससे आग विकराल हो गई। आग से वहां रखे अधिकतर महत्वपूर्ण दस्तावेज, फर्नीचर, कम्प्यूटर व कीमती सामान राख हो गए। डीजी मानीटरिंग सेल में भी कई महत्वपूर्ण फाइलों ने जलने की बात कही जा रही है।
प्रमुख सचिव पहुंचे निरीक्षण के लिए
स्वास्थ्य भवन में आग लगने की सूचना के बाद प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य अरविंद कुमार भी वहा पहुंच गए। मौके पर मौजूद महानिदेशक डॉ. विजयलक्ष्मी व अन्य अधिकारियों से आग लगने के कारणों की पड़ताल की और नुकसान का आकलन किया।
उन्होंने डेढ़ महीने के अंदर ही दोबारा आग लगने में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों से स्पष्टीकरण तलब करने के लिए कहा। 14 जून को फोर डी सेक्शन में आग लगने के बाद, सुरक्षा उपायों को नजरअंदाज करने पर उन्होंने नाराजगी जताई।
14 जून को खाक हो गया था एक सेक्शन
स्वास्थ्य भवन में 14 जून की रात नौ बजे दूसरे तल पर स्थित फोर डी सेक्शन में आग लगी थी। रविवार होने के कारण उस दिन महानिदेशालय बंद था और विशेष अनुमति लेकर विभाग को खोला गया था। शाम को कर्मचारियों के जाने के कुछ घंटों बाद पूरा सेक्शन धूं-धूं कर जल गया था। इस आग में खासतौर से बाबुओं से जुड़ी हजारों फाइलें जल गई थी।
इसमें कोर्ट केस से लेकर ट्रांसफर, फर्जी नियुक्तियों की फाइलें भी खाक हो गई थी। माना जा रहा था कि ये आग भ्रष्टाचार के सुबूत मिटाने के लिए लगाई गई थी। इसीलिए इस मामले की जांच मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद एसटीएफ को सौंप दी गई थी। अभी एसटीएफ इस मामले में कुछ कर पाती की 50 दिन केअंदर ही दूसरी बार आग लग गई।
एसटीएफ की टीम पहुंची
स्वास्थ्य भवन में बुधवार को आग लगने की जानकारी मिलने के बाद एसटीएफ की एक टीम भी वहां पहुंच गई। स्वास्थ्य महानिदेशालय पहुंचने के बाद उन्होंने घटनास्थल का जायजा लिया। किसी को भी वहां घुसने से मनाकर दिया गया, जिससे सुबूतों को जुटाया जा सके। मौके पर एक गार्ड की तैनाती कर दी गई है।
मामले पर चिकित्सा स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. विजयलक्ष्मी का कहना है कि आग लगने के कारणों का अभी पता नहीं लग पाया है। कार्यालय के अंदर पानी भरा होने के कारण कोई अंदर नहीं जा पाया है। आग में हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है। बार-बार आग की घटना से सवाल खड़े हो रहे हैं। इसलिए इस घटना की जांच में कोई कोताही नहीं बरती जाएगी।