मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को निवेशकों के दूसरे शिलान्यास समारोह की तैयारियों की समीक्षा की। इसमें निवेशकों के शिलान्यास से जुड़े प्रोजेक्ट की अड़चनों को दूर करने में अफसरों की सुस्ती पर मुख्यमंत्री ने नाराजगी जताई।
दूसरा शिलान्यास समारोह 20 जनवरी को लखनऊ में प्रस्तावित है। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पिछली बार के बराबर 60 हजार करोड़ की निवेश परियोजनाओं का शिलान्यास कराने की योजना है।
सूत्रों ने बताया कि सीएम ने दूसरे शिलान्यास समारोह से जुड़े प्रोजेक्ट की तैयारियों की विस्तार से समीक्षा की। इसमें पता चला कि लाइसेंस, भूमि खरीदने के लिए नियमों में रियायत, भूमि नामांतरण, कैबिनेट से अनुमोदन, लेटर ऑफ इंटेंट जारी करने जैसे मामलों पर अफसर कुंडली मारे बैठे हुए हैं।
शाहजहांपुर, हरदोई, बरेली, मिर्जापुर और बाराबंकी में प्रस्तावित प्रोजेक्ट के लिए 12.5 एकड़ से ज्यादा जमीन की जरूरत है। सरकार से इसमें छूट दी जाती है। इस प्रस्ताव पर भी कार्रवाई अटकी है। मिर्जापुर में आदित्य बिड़ला ग्रुप की 600 करोड़ से प्रस्तावित परियोजना आगे बढ़ाने को पौधरोपण के लिए जमीन चाहिए। इस पर भी निर्णय लंबित है।
अडानी ग्रुप का 500 करोड़ का प्रस्तावित प्रोजेक्ट कैबिनेट की मंजूरी के लिए अटका है। ग्रेटर नोएडा में एक निजी विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए लेटर फॉर इंटेंट उच्च शिक्षा विभाग में लंबित है। बैठक में शामिल एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को प्रत्येक प्रोजेक्ट की लंबित कार्रवाई तेजी से पूरी करने के निर्देश दिए हैं।