लखनऊ। आस्था नाट्य रंगमंडल समिति की ओर से संगीत नाटक अकादमी में तीन दिवसीय नाट्य समारोह का शुभारंभ सोमवार को पूर्ण पुरुष के मंचन के साथ हुआ। नाटक में अपूर्णता में पूर्णता की तलाश दिखी। वाल्मीकि रंगशाला में मंचित नाट्यकृति पूर्ण पुरुष एक ऐसे शख्स की कहानी है जो प्रतिभाशाली चित्रकार है जबकि पत्नी उसके स्वभाव के विपरीत स्वार्थी और संवेदनहीन स्त्री है। विजय पंडित ने इस नाटक को लिखा और निर्देशन रत्ना अग्रवाल का रहा।
मंचन के दौरान एक दृश्य में पत्नी शाश्वती कहती है कि सच तो यह है कि हम सब आधे-अधूरे हैं, जीवन में कोई भी पूर्ण नहीं होता। हमें अपनी अपूर्णता में ही पूर्णता की तलाश करनी चाहिए। मंच पर शाश्वती की भूमिका में रत्ना अग्रवाल और पति समग्र की भूमिका में अंकुर सक्सेना ने सशक्त अभिनय किया। मंच के पीछे प्रकाश व्यवस्था मनीष सैनी, संगीत डॉ. स्वप्निल अग्रवाल, रूपसज्जा साहिर अहमद और सेट निर्माण का जिम्मा आशुतोष विश्वकर्मा ने संभाला।