जाली अंकपत्र बनाने वालों की तलाश, विभागीय मिलीभगत की भी आशंका
लखनऊ। सहायक लेखाकार एवं लेखा परीक्षक भर्ती में 32 अभ्यर्थियों के दस्तावेज जाली मिलने के मामले में पुलिस ने विवेचना शुरू कर दी है। प्रारंभिक छानबीन में विभाग के तत्कालीन कर्मचारियों व अधिकारियों की मिलीभगत की भी आशंका जताई जा रही है। 2016 में कराई गई परीक्षा में लगाए गए जाली दस्तावेज आठ साल बाद उजागर हुए हैं। खास बात ये है कि 28 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र भी जारी कर दिया गया।
इंस्पेक्टर महानगर अखिलेश कुमार मिश्र ने बताया कि अभ्यर्थियों ने जाली शैक्षिक प्रमाण पत्र लगाए थे। ऐसे में जाली अंक पत्र बनाने वालों की तलाश की जा रही है। आरोपियों से पूछताछ कर पता लगाया जाएगा कि कहां से जाली प्रमाण पत्र बनवाए थे। विवेचना में बड़े गिरोह के पकड़े जाने की आशंका जताई जा रही है।
इंस्पेक्टर का कहना है कि सभी आरोपियों को नोटिस भेजा जाएगा। पुलिस की दो टीमें लगाई गई हैं। विभाग की ओर से आंतरिक जांच की गई थी। विभाग ने जांच रिपोर्ट सौंपी है। सभी बिंदुओं पर साक्ष्य संकलन किया जा रहा है। इसके आधार पर गिरफ्तारी की जाएगी।
अब तक नहीं मिला फर्जी अंक पत्र बनाने वाला सरगना
निशातगंज में फर्जी अंकपत्र बनाने का मामला सामने आया था। पुलिस ने गिरोह के एक गुर्गे को गिरफ्तार किया था। हालांकि सरगना मनीष भाग निकला था। एक बार फिर जाली अंकपत्र से नौकरी पाने का मामला सामने आने के बाद महानगर पुलिस सरगना की तलाश कर रही है। आशंका जताई जा रही है कि आरोपियों ने मनीष से फर्जी दस्तावेज तैयार कराए थे। हालांकि, पुलिस का कहना है कि दोनों प्रकरण अलग-अलग हैं। मनीष के पकड़े जाने के बाद मामला स्पष्ट हो सकेगा।
ये है मामला
सहायक लेखाकार एवं लेखा परीक्षक भर्ती 2016 में चयनित अभ्यर्थियों में 32 के दस्तावेज जांच में फर्जी मिले थे। महानगर थाने में इनके खिलाफ सहायक लेखाधिकारी ललित कुमार ने एफआईआर दर्ज कराई थी। 2014 में उप्र अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने इस भर्ती के लिए परीक्षा कराई थी।