लखनऊ। शिक्षा को किताबी दायरों से निकालकर जीवन से जोड़ने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। अब बेसिक और माध्यमिक विद्यालयों में विद्यार्थियों की दिनचर्या में अखबार को शामिल किया जाएगा। शासन के निर्देश के बाद माध्यमिक शिक्षा विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. प्रदीप कुमार ने डीआईओएस व सभी विद्यालयों को इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। अखबार को स्कूल की दिनचर्या में शामिल करने की यह पहल शिक्षा को परीक्षा-केंद्रित से ज्ञान-केंद्रित बनाने की दिशा में एक सार्थक कदम मानी जा रही है।
इस पहल के पीछे उद्देश्य सिर्फ समाचार पढ़वाना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में सोचने, समझने और सवाल करने की आदत को विकसित करना है। विज्ञान प्रगति अधिकारी डॉ. दिनेश कुमार ने बताया कि बढ़ता मोबाइल स्क्रीन टाइम बच्चों की पढ़ने की संस्कृति को कमजोर कर रहा है। ऐसे में समाचार पत्र वाचन शिक्षा सुधार का प्रभावी माध्यम बनकर सामने आया है।
नई व्यवस्था के तहत विद्यालयों की प्रार्थना सभा अब सिर्फ अनुशासन की नहीं, बल्कि जागरूकता की पाठशाला बनेगी। चक्रानुसार हर कक्षा के छात्र-छात्राएं देश-दुनिया की खबरें पढ़कर समसामयिक विषयों से जुड़ेंगे।
इस बदलाव से विद्यार्थियों की भाषा और शब्दावली समृद्ध होगी, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को दिशा मिलेगी और आलोचनात्मक व तार्किक सोच को बल मिलेगा। साथ ही सामाजिक चेतना, सामुदायिक सहभागिता और संवेदनशील दृष्टिकोण का भी विकास होगा।
शिक्षा सुधार की इस पहल को कक्षा तक सीमित नहीं रखा गया है। कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों को सप्ताह में एक बार किसी संपादकीय विषय पर मौलिक लेखन और समूह चर्चा कराई जाएगी, जिससे विचार, संवाद और अभिव्यक्ति की संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा।