घपले के दूसरे तरीके में कर्मचारी राकेश कुमार सिंह ने स्वयं के खाते में और पत्नी के साथ संयुक्त खाते में 35,19,421 रुपये ट्रांसफर किए। इसमें 12 वास्तविक पेंशनर्स का नाम दिखाया गया, पर खाता संख्या राकेश कुमार सिंह और उसकी पत्नी मधुलता सिंह का था। राशि अंतरित करने के बाद वास्तविक पेंशनर्स का पहले वाला खाता ही रिकॉर्ड में फीड कर दिया गया।
कोषागार में खाता संख्या बदलने का डाटा संरक्षित नहीं मिला। घपले के तीसरे तरीके में राकेश कुमार सिंह व उसकी पत्नी मधुलता सिंह के नाम खोले गए खातों में कोषागार से 7,12,738 रुपये आहरित कर भेजे गए। इस तरह करीब 5.45 करोड़ का गबन किया गया। इस मामले में शासन भी उच्चस्तरीय जांच करा रहा है।
सूत्रों का कहना है कि ट्रेजरी ऑफिसर के लॉगइन और उसके मोबाइल नंबर पर भेजे गए ओटीपी का पता किए बिना घपला संभव नहीं था। इसलिए इसमें बड़े अधिकारियों की मिलीभगत भी तय है। हालांकि, पूरी स्थिति साफ होने के लिए जांच रिपोर्ट का इंतजार करना होगा।