फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

फर्जी पेंशन पेमेंट ऑर्डर से किया था 5.45 करोड़ रुपये का घपला, कई बड़े अधिकारियों पर गाज गिरनी तय

Thu, 27 Aug 2020 12:35 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
विज्ञापन
हरदोई के कोषागार में तीन हैरतअंगेज तरीकों से 5.45 करोड़ रुपये का घपला किया गया था। फर्जी पेंशन पेमेंट ऑर्डर (पीपीओ) तैयार करके खातों में राशि भेजी गई। वास्तविक पेंशनरों के नाम के आगे फर्जी खाता संख्या दर्ज कर और एक कर्मचारी के स्वयं के व उसकी पत्नी के संयुक्त खाते में धनराशि ट्रांसफर की गई।
विज्ञापन


आंतरिक लेखा एवं लेखा परीक्षा विभाग की रिपोर्ट में इसका खुलासा किया गया है। शासन भी मामले की उच्चस्तरीय जांच करा रहा है, जिसमें कई बड़े अधिकारियों पर गाज गिरनी तय है।  वर्ष 2009-16 के बीच हरदोई के कोषागार में यह गबन किया गया। ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि इन वर्षों के पेंशन पेमेंट स्टेटमेंट की गहन जांच में पता चला कि फर्जी पीपीओ तैयार किए गए थे।

रिकॉर्ड में एक ही खाता संख्या पर खाताधारक का नाम अलग-अलग मिला। उदाहरण के तौर पर दो अलग-अलग क्रमांकों पर छोटेलाल और छोटे सिंह का नाम दिया गया, पर उनका बैंक खाता समान ही मिला। ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि मूल पीपीओ, इंडेक्स पंजिका और कैलकुलेशन शीट कोषागार हरदोई में उपलब्ध नहीं है।
विज्ञापन


इंडेक्स रजिस्टर भी मेंटेन नहीं मिला। भिन्न-भिन्न नामों से फर्जी पीपीओ नंबर अंकित कर बैंक खातों में कोषागार से राशि आहरित कर भेजी गई। इस तरह 90 फर्जी पेंशनरों के नाम से 5 करोड़ 3 लाख 11 हजार 722 रुपये का घपला किया गया। घपले के इस पहले तरीके में पेंशनर और पीपीओ फर्जी थे।
विज्ञापन

जांच रिपोर्ट का करना होगा इंतजार

घपले के दूसरे तरीके में कर्मचारी राकेश कुमार सिंह ने स्वयं के खाते में और पत्नी के साथ संयुक्त खाते में 35,19,421 रुपये ट्रांसफर किए। इसमें 12 वास्तविक पेंशनर्स का नाम दिखाया गया, पर खाता संख्या राकेश कुमार सिंह और उसकी पत्नी मधुलता सिंह का था। राशि अंतरित करने के बाद वास्तविक पेंशनर्स का पहले वाला खाता ही रिकॉर्ड में फीड कर दिया गया।

कोषागार में खाता संख्या बदलने का डाटा संरक्षित नहीं मिला। घपले के तीसरे तरीके में राकेश कुमार सिंह व उसकी पत्नी मधुलता सिंह के नाम खोले गए खातों में कोषागार से 7,12,738 रुपये आहरित कर भेजे गए। इस तरह करीब 5.45 करोड़ का गबन किया गया। इस मामले में शासन भी उच्चस्तरीय जांच करा रहा है। 

सूत्रों का कहना है कि ट्रेजरी ऑफिसर के लॉगइन और उसके मोबाइल नंबर पर भेजे गए ओटीपी का पता किए बिना घपला संभव नहीं था। इसलिए इसमें बड़े अधिकारियों की मिलीभगत भी तय है। हालांकि, पूरी स्थिति साफ होने के लिए जांच रिपोर्ट का इंतजार करना होगा। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें