यूपीए सरकार द्वारा रोजगार देने के लिए चलाई गई मनरेगा में लूट के रिकॉर्ड बना दिए गए। यहां तक कि 80 रुपये प्रतिकिलो मिलने वाली धनिया 584 रुपयें में खरीदी गई।
सामने आए घोटालों को देखेने के बाद उच्च न्यायालय ने अब पूरे प्रदेश में मनरेगा घोटाला की जांच के निर्देश दिए हैं। पर, इनमें कुछ जिले तो ऐसे हैं जिन पर सीबीआई का शिकंजा विशेष तौर पर कस सकता है।
जांच में न सिर्फ सरकारी धन की बड़े पैमाने पर लूट सामने आएगी बल्कि घोटालेबाजों की तरह-तरह की हैरान कर देने वाली करतूत भी उजागर होगी। यह भी पता चलेगा कि घोटालेबाजों ने घपलों के कैसे-कैसे खेल खेले हैं।
स्वाभाविक है कि जांच होने से इन जिलों में तैनात रहे अधिकारियों की गर्दन भी नहीं बचेगी। जो जिले सीबीआई के निशाने पर विशेष तौर पर आ सकते हैं, उनमें कानपुर देहात, बांदा, सुल्तानपुर, इटावा, सिद्धार्थनगर, मथुरा, चित्रकूट, औरैया, सीतापुर व ललितपुर शामिल हैं।
शाक-भाजी बांटने के नाम पर लूट
इनमें कहीं शाक-भाजी के बीज बांटने के नाम पर मनरेगा के धन को लूट लिया गया तो कहीं मजदूरी देने में हेराफेरी हुई तो कहीं डिजिटल कैमरों की खरीद पर पैसा लुटा दिया गया।
कुछ जिलों में शत-प्रतिशत तालाबों की मरम्मत हो गई और लक्ष्य से ज्यादा तालाब खुदवा दिए गए। जांच हुई तो पता चला कि तालाब सिर्फ कागजों पर खुदे हैं। कुछ जगह स्वयंसेवी संस्थाओं को मनमाने तरीके से उपकृत करने का खेल उजागर हो चुका है।
ग्राम्य विकास मंत्री के गांव तक में खेल: वर्ष 2010-11 में तत्कालीन ग्राम्य विकास मंत्री दद्दू प्रसाद के हमीरपुर में 80 प्रतिशत तक धन सामग्री पर खर्च करने का मामला सामने आया। बांदा के इटावा गांव में घाट बनवाने के काम पर मजदूरी की मद में 67 हजार और सामग्री पर लगभग 2 लाख रुपये से अधिक खर्च करने का घपला उजागर हुआ।
ललितपुर के बिर्धा ब्लाक के जमुंध अनाकला में प्राइमरी पाठशाला के बाउंड्रीवॉल बनवाने पर मजदूरी की मद में लगभग 23 हजार रुपये और सामग्री पर 1.37 लाख रुपये से ज्यादा खर्च कर दिए गए।
बिना सामग्री खरीदे हो गया निर्माण
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय में उस समय संयुक्त सचिव डीके जैन की तरफ से इस तरह के मामलों पर आपत्ति जताई गई। कहा गया कि बार-बार ध्यान दिलाने के बावजूद मजदूरी और सामग्री पर खर्च में 60 :40 के अनुपात का ध्यान नहीं रखा जा रहा है।
यह मनरेगा अधिनियमों का उल्लंघन है। राज्य सरकार को इस पर खुद ही ध्यान देकर कार्रवाई करनी चाहिए। कुछ जगहों पर मजदूरी पर तो खर्च दिखा दिया गया लेकिन सामग्री पर खर्च शून्य रहा तो कुछ जगह सामग्री पर खर्च बहुत ज्यादा और मजदूरी पर काफी कम रहा।
ऐसे में सवाल उठता है कि यह संभव कैसे है कि मजदूरों ने काम किया हो लेकिन सामग्री न खरीदनी पड़ी हो।
कागजों पर खुदे हैं आदर्श तालाब
जांच में तालाब के नाम पर मनरेगा धन की लूट भी सामने आएगी। आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश की 51439 गांव पंचायतों में 43964 में 2011 तक तालाब बन चुके थे।
इनमें भी गाजियाबाद, गाजीपुर, गोरखपुर, जौनपुर, महराजगंज, बागपत, मेरठ,बलरापुर, बहराइच, फैजाबाद, बाराबंकी, सुल्तानपुर, बस्ती, सिद्धार्थनगर, लखनऊ, हरदोई, खीरी, सहारनपुर, प्रतापगढ़, फतेहपुर, पीलीभीत, शाहजहांपुर, झांसी, ललितपुर, आगरा, मथुरा, बलिया, मऊ, जे.पी. नगर,रामपुर, इटावा, औरैया, रमाबाईनगर व फर्रुखाबाद में लगभग सभी ग्राम पंचायतों में तालाब बन चुके थे।
इनमें हुई अलग-अलग जांच में फैजाबाद, बाराबंकी, सीतापुर, कानपुर देहात, सुल्तानपुर सहित कई जिलों में गड़बड़ियां उजागर हो चुकी हैं।
जिनके पास खेत नहीं उन्हें बांट दिए बीज
कानपुर देहात में अफसरों ने ऐसे लोगों को बीज खरीदकर बांट दिए जिनके पास खेत तक नहीं थे। 80 रुपये प्रति किलोग्राम कीमत वाले धनिया के बीज 584 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदे गए।
200 रुपये वाला संकर प्याज 1750 रुपये किलो, 27500 रुपये वाला टमाटर 30600 रुपये, 30 हजार रुपये वाला संकर मिर्च 30600 तता 1420 वाली भिंडी के बीज 1445 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदे गए।
सूबे के तत्कालीन राज्य क्वालिटी मॉनिटर विनोद शंकर चौबे ने जांच की। जांच रिपोर्ट में उजागर हुआ कि उद्यानीकरण (शाक-भाजी) कार्यक्रम में न सिर्फ अधिनियम केप्रावधानों का उल्लंघन कर अपात्र लोगों का चयन किया गया बल्कि ऐसे बीज बांटे गए जो उगे ही नहीं। पर, कार्रवाई नहीं हुई।
प्रचार में भी खेल
कई जिलों में नुक्कड़ नाटक के जरिये प्रचार-प्रसार, एमआईएस फीडिंग, कन्वर्जेंस के नाम पर दूसरे विभागों को दी गई धनराशि में भी बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां पाई गई हैं।
उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने इसी वर्ष जनवरी में सात जिलों में मनरेगा घोटाले की जांच का आदेश दिया था। यह जिले हैं, गोंडा, बलरामपुर, कुशीनगर, संतकबीरनगर, मिर्जापुर, सोनभद्र व महोबा।
एक नजर घोटालों पर...
- कानपुर देहात में स्वयंसेवी संस्था को 15 लाख रुपये का प्रचार-प्रसार कार्य आवंटित । महराजगंज में स्वयंसेवी संस्था को 50 लाख रुपये का प्रचार-प्रसार कार्य आवंटित
- सुल्तानपुर, मथुरा एवं चित्रकूट में नियमों को दरकिनार कर उत्तर प्रदेश सहकारी निर्माण एवं विकास संघ लि. नामक संस्था को करोड़ों रुपये के कार्य आवंटित करने का मामला
- चित्रकूट में लगभग 50 लाख रुपये से 700 डिजिटल कैमरों की खरीद
- सीतापुर में तालाबों के निर्माण में लाखों का घपला
- औरैया में ट्री गार्डों की खरीद पर लगभग 56 लाख रुपये का घपला
- बांदा में दो करोड़ रुपये की मेज-कुर्सी की खरीद
- सिद्धार्थनगर में 1210 ग्राम पंचायतों में 15 लाख रुपये से शिकायत पेटिकाओं की खरीद