फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नगर निगम अफसरों की करतूत, करोड़ों की सरकारी जमीन कर दी किसी बाहरी व्यक्ति के नाम

Wed, 05 Sep 2018 01:07 PM IST
प्रवेंद्र गुप्ता, अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
डेमो - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
लखनऊ में नगर निगम अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से करोड़ों की सरकारी जमीन 12 साल पहले किसी बाहरी व्यक्ति के नाम कर दी गई। इतने साल से यह जमीन घोटाला दबा रहा। बीते दिनों नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना ने निर्देश पर अवैध कब्जा हटाने पहुंची टीम ने जब कार्रवाई शुरू की तब जमीन के तथाकथित मालिक ने गृहकर की रसीद पेश की और जमीन पर अपना मालिकाना हक जताते हुए कहा कि नगर निगम में उसी के नाम गृहकर निर्धारण है। घोटालेबाजों पर कार्रवाई के बजाय, फिलहाल नगर निगम फाइलें खंगालवा रहा है। 
विज्ञापन


नगर निगम की 13 हजार वर्ग फीट की यह जमीन गोमती नगर में है। जानकारों का कहना है कि जिस जगह पर यह जमीन है, वह व्यावसायिक इलाका है। इस इलाके में जमीन की कीमत 15 से 20 हजार रुपये है। ऐसे में इस जमीन की कीमत करीब 20 करोड़ रुपये आंकी जा रही है। 

ऐसे सामने आया घोटाले का सच
बीती सात जुलाई को नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना चिनहट द्वितीय वार्ड में सफाई व्यवस्था को निरीक्षण पर गए थे। यहां के विजयीपुर गांव में निरीक्षण के दौरान नए हाईकोर्ट परिसर के गेट नंबर दो केसामने खाली पड़ी नगर निगम की जमीन पर कब्जा किए जाने की शिकायत स्थानीय लोगोें ने। मंत्री ने अवैध कब्जा हटाने का निर्देश दिया था। इसी के बाद 18 अगस्त को कब्जा हटाने टीम गई थी।
विज्ञापन


गृहकर रसीद देख अफसरों के उड़ गए होश
कब्जेदार ने जब अवैध कब्जा हटाने आए अफसरों को गृहकर की रसीद दिखाई तो वह भी हैरान रह गए। नगर निगम ने जिस जमीन का गृहकर निर्धारण किया था, वह विजयीपुर गांव की खसरा नम्बर 110 की जमीन है।

यह राजस्व अभिलेखों में आबादी दर्ज है और इसका कुल क्षेत्रफल 1.341 हेक्टेयर है। इसमें से ही करीब 13 हजार वर्ग फीट जमीन पर अवैध कब्जा था। उसी जमीन का गृहकर निर्धारण सुरेश प्रसाद गौतम पुत्र बंगाली गौतम केनाम किया गया था।
Trending Videos
विज्ञापन

पहले भी हुए घोटाले

डेमो
नगर निगम की जमीन का गृहकर निर्धारण किए जाने का यह मामला सामने आने के बाद अब पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने के साथ ही गृहकर निर्धारण निरस्त करने की कार्यवाही भी शुरू कर दी गई है। इसको लेकर नगर निगम सम्पत्ति विभाग की ओर से जोनल अधिकरी जोन चार को पत्र भी भेज दिया गया है। इसके अलावा जमीन को सुरक्षित करने के लिए उसकी तारबाड़ भी की जाएगी। नगर आयुक्त ने इसके लिए मुख्य अभियंता को आदेश जारी कर दिया है। 

दूसरे के नाम से गृहकर निर्धारण कर जमीन घोटाले को अंजाम देने के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। आशियाना क्षेत्र में और कानपुर रोड पर पूर्व में अयूब नामक बाबू के कई कारनामे पकड़े गए। दोषी पाए जाने पर उसको निलंबित भी किया गया।

मामले की गम्भीरता को देखते हुए उसे बर्खास्त किया जाना था, मगर कर्मचारी नेताओं और अफसरों के करीबियों की साठगांठ के कारण वह फिर बहाल हो गया है।उसे समिति विभाग में तैनात किया गया, पर उसने सेटिंग से अपना तबादला जोन आठ के स्वास्थ्य विभाग में जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र सेक्शन में करा लिया है। जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने का काम भी कमाई का माना जाता है। घोटालेबाज को बहाल किए जाने को लेकर तरह-तरह की चर्चाए हैं, मगर निगम प्रशासन कान बंद किए हुए है।

12 साल से दबा था मामला
यह गृहकर निर्धारण 2006 में हुआ है। स्वकर निर्धारण केतहत यह कराया गया है। 12 साल से मामला दबा था। यह किस आधार पर किया गया था, उसको लेकर पूरी फाइल निकालने का निर्देश दिया गया है। उसके बाद जो आदेश नगर आयुक्त का होगा उस पर अमल किया जाएगा। - सुजीत श्रीवास्तव, जोनल अधिकारी, नगर निगम
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें