रिपोर्ट में कहा गया है कि खरीद में आलमनगर, कृष्णा नगर व सिंधु नगर क्षेत्र की चार फर्मों को नियमों के विपरीत फायदा पहुंचाया गया। इन फर्मों में उद्यान विभाग के अधिकारियों की पार्टनरशिप भी है। चार चहेती फर्मों को काम दिलाने के लिए एक ऐसी कंपनी के 23 कोटेशन लगाए गए, जो 15 साल पहले बंद हो चुकी है।
एक अन्य कंपनी के 53 कोटेशन लगाए गए, लेकिन उसके नाम एक भी काम आवंटित नहीं किया गया। जाहिर है कि ये 53 कोटेशन भी आंख में धूल झोंकने के लिए लगाए गए। चहेती फर्मों से गमले और पौधे खरीदने के लिए अन्य फर्मों से इनके रेट मैच कराए गए।
जो काम 20 लाख में होता उसपर खर्च किए 32 लाख
रिपोर्ट में कहा गया है कि खरीद प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर फर्जी पेपर्स का इस्तेमाल किया गया। कई ऐसी कंपनियों के पेपर्स लगाए गए, जिनका जांच में अस्तित्व ही नहीं मिला।
गमलों के परिवहन पर 32 लाख रुपये खर्च दिखाए गए, जबकि बाजार रेट पर यह काम 20 लाख रुपये में आसानी से पूरा किया जा सकता था। चहेती फर्मों को ही अधिकतर ऑर्डर दिए गए। रिपोर्ट में कुल नुकसान का आकलन 50 से 60 लाख रुपये के बीच किया गया है।
मामले पर कृषि उत्पादन आयुक्त प्रभात कुमार का कहना है कि जांच रिपोर्ट मिल चुकी है। रिपोर्ट पर परीक्षण के बाद ही कुछ कह पाऊंगा। फिलहाल इतना कहूंगा कि काफी गड़बड़ियां मिली हैं।