गौरतलब है कि निदेशालय स्तर से पोषाहार आपूर्ति की समय सीमा का विस्तार किए जाने का प्रस्ताव 20 अप्रैल को शासन को भेजा गया था, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के आदेश का कोई जिक्र नहीं था। इसे छिपाकर अधिकारियों ने उस प्रस्ताव पर 23 अप्रैल को अनुमोदन प्राप्त कर लिया था।
अनुमोदित फाइल पहुंचने के साथ ही गृह विभाग द्वारा सतर्कता जांच का आदेश भी बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग के पास पहुंच चुका था। इसके मद्देनजर प्रमुख सचिव ने पोषाहार आपूर्ति आदेश (डीआई) जारी करने पर रोक लगा दी थी। कुछ दिन बाद प्रमुख सचिव जब लंबे अवकाश पर चली गईं तो इस फाइल को फिर से चला दिया गया।
सूत्रों के मुताबिक प्रमुख सचिव द्वारा लगाई रोक की वजहों का निस्तारण करके फाइल को दुबारा अनुमोदन के लिए भेजा गया, जिस पर अनुमोदन मिल गया है। बुधवार को निदेशालय ने आपूर्ति आदेश जारी भी कर दिया है।
नई निविदा न मांगने पर उठे सवाल
2018 में जारी निविदा की अवधि इस साल 25 अप्रैल को समाप्त हो रही थी। जबकि नई निविदा की प्रक्रिया पुरानी निविदा की तिथि समाप्त होने के तीन-चार माह पहले ही शुरू कर दी जाती है। इसके बाद भी नई निविदाएं नहीं मांगी। जबकि उस समय लॉकडाउन की स्थिति भी नहीं थी। इसको लेकर सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक अधिकारी इन कंपनियों को ही आपूर्ति का काम देने के लिए जानबूझ कर देरी किए और बाद में लॉकडाउन की आड़ लेकर अपरिहार्य स्थिति दिखाते हुए आपूर्ति की अवधि को 4 माह बढ़ाने का प्रस्ताव भेज दिया।
- आदित्य फ्लोर मिल प्राइवेट लिमिटेड
- नीलगिरी फूड प्रोडक्टस प्राइवेट लिमिटेड
- त्रिकाल फूड एंड एग्रो प्रोडक्टस प्रा.लि.
- राउसीना उद्योग लिमिटेड
- पीबीएस फूडस प्राइवेट लिमिटेड
- देवेश फूड एंड एग्रो प्रोडक्टस प्रा.लि.
- सुरुचि फूड्स प्राइवेट लिमिटेड
- राशि न्यूट्री फूड्स
- कोटा दाल मिल
- कॉन्टीनेंटल मिलकोज इंडस्ट्रीज लिमिटेड
- इंटरलिंक फूड्स लिमिटेड
- कैमैस्टर फूड इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड
- श्री लालजी एनर्जी फूड्स प्राइवेट लिमिटेड
- हेल्थकेयर इनर्जी फूड प्राइवेट लिमिटेड