बीज विकास निगम के स्टोर से जिला कृषि अधिकारी बीज उठाते हैं। इसके लिए वे एक पावती रसीद भी स्टोर प्रशासन को देते हैं। इसकी एक प्रति जिला कृषि अधिकारियों के पास रहती है। स्टोर प्रशासन ने रसीदों में ओवरराइटिंग करके या फिर जितनी मात्रा में बीज दिया, उससे ज्यादा दिखाकर रसीद निदेशालय को भेजी। यह खेल कब से किया जा रहा था, इसका खुलासा गहन जांच के बाद ही हो सकेगा।
पिछले 16 साल में हुई खरीद की जांच का फैसला
शासन के एक उच्च अधिकारी ने बताया कि बीज विकास निगम की वर्ष 2002 में स्थापना से लेकर अब तक निगम से खरीदे गए बीज की जांच का फैसला किया गया है। इस जांच में करोड़ों रुपये का घपला सामने आने की आशंका है।
जिन जिला कृषि अधिकारियों ने निदेशालय की बिना अनुमति के निगम के स्टोर से निर्धारित मात्रा से ज्यादा बीज उठाया, उनसे भी जवाब तलब किया जा रहा है। उनसे पूछा गया है कि किन परिस्थितियों में और क्यों उन्होंने ऐसा किया। इसके लिए सक्षम स्तर से पूर्वानुमति क्यों नहीं ली गई।
बीज विकास निगम द्वारा भेजे गए कुछ संदिग्ध बिल पकड़ में आए हैं। इनकी जांच कराई जा रही है। इस संबंध में निगम को पत्र भेजा गया है। साथ ही करीब 17 करोड़ रुपये का बिल भुगतान रोक दिया गया है। शासन को भी स्थिति से अवगत करा दिया गया है।
-वीपी सिंह, अपर कृषि निदेशक, बीज एवं प्रक्षेत्र