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Lucknow News: भर्ती को लेकर एससी आयोग ने केजीएमयू वीसी को किया तलब

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शिक्षक भर्ती में रोस्टर का पालन न करने का आरोप
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माई सिटी रिपोर्टर

लखनऊ। केजीएमयू में शिक्षक भर्ती का मामला उलझता जा रहा है। राष्ट्रीय अधिवक्ता मंच की शिकायत के बाद अनुसूचित जाति आयोग ने केजीएमयू वीसी को तलब किया है। केजीएयू प्रशासन को मंगलवार को भर्ती मामले में अपना पक्ष रखना है। केजीएमयू प्रशासन पिछले सप्ताह भर्ती संबंधी विज्ञापन का संशोधन जारी कर चुका है, लेकिन बताया जा रहा है कि अभी भी शिकायतकर्ता उससे संतुष्ट नहीं हैं।

राष्ट्रीय अधिवक्ता मंच के संयुक्त मंत्री सुशील कुमार चौधरी ने आयोग को की गई शिकायत में ईडब्ल्यूएस कोटे के आरक्षण रोस्टर के लिए जारी शासनादेश का पालन नहीं करने का आरोप लगाया है। उनके अनुसार नियम विरुद्ध 80 पदों के विज्ञापन में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को रोस्टर में दसवां पद न देकर मनमाने विभागों में आरक्षण दिया गया है। इसकी वजह से अन्य वर्ग को नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस मामले में आयोग की सदस्य डॉ अंजू बाला के निर्देश पर 23 मार्च ने केजीएमयू प्रशासन को कार्यालय में उपस्थित होने के लिए कहा गया था। केजीएमयू की ओर से असमर्थता जताते हुए अतिरिक्त समय की मांग की थी। इसके बाद अब 23 मई की तारीख नियत की गई है। आयोग के पत्र में केजीएमयू प्रशासन को समय के भीतर उत्तर न देने पर संवैधानिक शाक्तियों का प्रयोग करने की बात कही गई है। केजीएमयू में इस समय 500 से ज्यादा शिक्षकों के पद हैं। इसमें से काफी पद अभी खाली हैं। इनकी भर्ती प्रक्रिया पूरी करने के लिए केजीएमयू प्रशासन ने पिछले साल विज्ञापन निकाला था।
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कुलपति के खिलाफ जनहित याचिका

लखनऊ। केजीएमयू के कुलपति का कार्यकाल समाप्त होने से पहले ही उनकी मुश्किलें बढ़ने लगी हैं। कोरोना किट खरीद और कुछ अन्य मामलों में उनके खिलाफ लोकायुक्त ने जांच के आदेश दे रखे हैं। यह जांच अभी भी लंबित है। इसे देखते हुए अब इस मामले में शिकायतकर्ता ने जनहित याचिका दाखिल की है। शिकायतकर्ता श्रीकांत सिंह ने कोरोना काल में कोविड जांच किट की खरीद में अनियमितता, नियुक्ति में अनियमितता समेत कई बिंदुओं पर शिकायत की थी। इस पर कोई कार्रवाई न होने पर अब उन्होंने जनहित याचिका का सहारा लिया है। असल में लोकायुक्त ने शासन से इस मामले की जांच करने को कहा था। केजीएमयू राजभवन के अधीन आता है। ऐसे में पत्र वहां भेज दिया गया था। इसके बाद इस मामले में कई बार पत्र लिखे जा चुके हैं, पर मामला आगे नहीं बढ़ा।
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