चुनावी आचार संहिता सिर्फ जनप्रतिनिधियों के लिए लागू नहीं होती है, बल्कि इसका असर बच्चों पर भी पड़ रहा है।
चुनावी आचार संहिता के फेर में सर्व शिक्षा अभियान का बजट भी फंस गया है।
मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने यह साफ कर दिया है कि आचार संहिता समाप्त होने के बाद भी अब बजट रिलीज किया जाएगा।
राज्य सरकार को अब केंद्र में नई सरकार के गठन का इंतजार करना होगा। इसके बाद ही बजट मिल पाएगा।
इससे संविदा पर कार्यरत शिक्षा मित्रों, विशेषज्ञ शिक्षकों और ब्लॉकों में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटर और सहायक लेखाकारों के मानदेय का संकट खड़ा हो गया है।
सर्व शिक्षा अभियान के तहत बेसिक शिक्षा की पढ़ाई निर्भर है।राज्य सरकार ने इस बार सर्व शिक्षा अभियान के तहत 13477.82 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा था।
इसमें मानसिक मंद, जापानी इंसेफलाइटिस (जेई) बुखार वाले 5256 बच्चों को घर पर शिक्षा देने, 1546 प्राथमिक, 198 उच्च प्राथमिक स्कूल खोलने, परिषदीय स्कूलों में 6445 अतिरिक्त क्लास रूम का प्रावधान था।
इसके अलावा 71,728 स्कूलों में चारदीवारी बनाने, 3257 में पेयजल की सुविधा और 2047 छात्रों व 1271 बालिकाओं के लिए शौचालय बनाने का प्रावधान किया गया है।
मानव संसाधन विकास मंत्रालय राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ प्रस्तावित बजट पर चर्चा भी कर चुका है।
इसमें कुछ प्रस्तावों को छोड़ दें तो अधिकतर पर सहमति बन चुकी है। केंद्र सरकार सर्व शिक्षा अभियान के तहत बजट जारी करता इससे पहले आचार संहिता लागू हो गई।
राज्य सरकार ने कुछ जरूरी मदों में पैसे देने की मांग भी की थी।
मसलन संविदा पर कार्यरत शिक्षकों, शिक्षा मित्रों और ब्लॉकों पर कार्यरत लेखाकार और कंप्यूटर ऑपरेटरों का मानदेय का पैसा मांगा गया था लेकिन इसे भी अभी तक नहीं दिया गया है। इससे इनका मानदेय फंस हुआ है।