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फैसले के बाद बोला संत समाज, मंदिर निर्माण में सहयोग करें मुसलमान

Thu, 27 Sep 2018 09:16 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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महंत नृत्यगोपाल दास व रामदास, अयोध्या का एक दृश्य
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सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए संतों ने कहा कि मुस्लिमों को अपनी जिद छोड़ देनी चाहिए। वह मंदिर निर्माण में सहयोगी बनें। श्रीराम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष और मणिराम दास छावनी के महंत नृत्य गोपाल दास महाराज ने कहा मंदिर निर्माण होकर रहेगा।

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सुप्रीम कोर्ट का आज का निर्णय मंदिर निर्माण में बाधक बने लोगों को अक्स दिखाने वाला है। श्रीराम जन्मभूमि न्यास के सदस्य महंत सुरेश दास ने कहा नमाज इस्लाम का हिस्सा है पर मस्जिद का नही परंतु देवी-देवताओं की मूर्ति मंदिर का अटूट हिस्सा है। जिसे अब मुस्लिमों को स्वीकार कर लेना चाहिए। कहा कि इस निर्णय के बाद हमें उम्मीद हो गई है कि अब कुछ ही महीनों में राममंदिर का भी निर्णय आ जाएगा।

रामजन्मभूमि न्यास के वरिष्ठ सदस्य डॉ. रामविलास दास वेदांती ने कहा कि नमाज पढ़ने के लिए मस्जिद की आवश्यकता कैसे हो सकती है। नमाज तो कहीं भी पढ़ी जा रही है। कहा कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय सराहनीय है और मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करने वाला है। यदि यह मामला बड़ी बेंच को भेज दिया जात तो सुनवाई में देरी होती कहीं न कहीं अयोध्या मामला भी प्रभावित होता।
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अब जल्द ही अयोध्या मामले में निर्णय आने की उम्मीद प्रबल हुई है। मणिराम दास छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास महाराज ने कहा सुप्रीम कोर्ट का आज का निर्णय मंदिर निर्माण के मार्ग को बल प्रदान करेगा। नाका हनुमानगढ़ी के महंत रामदास ने कहा कि नमाज कहीं भी पढ़ी जा सकती है लेकिन पूजा केवल मंदिर में। सुप्रीम कोर्ट ने जो निर्णय दिया है वह स्वागत योग्य है।

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विहिप ने कहा मंदिर निर्माण को मिलेगा बल

विहिप के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस फैसले से मंदिर निर्माण को बल मिलेगा तथा मस्जिद समर्थकों को बेवजह की जिद्द छोड़ देना चाहिए। कहा कि उत्खनन में पहले ही सिद्ध हो चुका है कि विवादित भूमि पर मंदिर ही था, सारे कथ्य और तथ्य हमारे पक्ष में हैं। मंदिर निर्माण और न्यायालय से आये इस फैसले के प्रत्येक पहलुओं पर अब 5 अक्तूबर को दिल्ली मे संत उच्चाधिकार समिति की बैठक में मंथन कर व्यापक रणनीत बनाई जाएगी।

विहिप के केंद्रीय सलाहकार सदस्य पुरुषोत्तम नारायण सिंह ने कहा मस्जिद में नमाज कोई आवश्यक नही है। कहीं भी जब पढ़ी जा सकती तो श्रीराम जन्मभूमि को विवादास्पद बनाना मुस्लिमों के हित में उचित नही है। यह निर्णय भविष्य को बल प्रदान करने वाला सिद्ध होगा। 
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