लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग ने वैदिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का अनोखा संगम पेश करते हुए एक खास वायु शोधक यंत्र का मॉडल तैयार किया है। इस अभिनव यंत्र में वैदिक यज्ञ प्रणाली और आयुर्वेद में वर्णित तुलसी, अनंत पुष्प, गुग्गुल जैसी आयुर्वेदिक वनस्पतियों के अर्क के साथ साल वृक्ष की गोंद (लोबान) व घृत का उपयोग किया जाएगा। इन तत्वों के संपर्क में आकर स्थानीय हवा और वायुमंडल को शुद्ध करने का दावा किया गया है।
विभागाध्यक्ष डॉ. अभिमन्यु सिंह और डॉ. अशोक कुमार शतपथी ने बताया कि उनके इस डिजाइन को भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय से स्वीकृति भी मिल चुकी है। यह यंत्र वायु प्रदूषण नियंत्रण और जलवायु परिवर्तन से निपटने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। खासकर शैक्षिक संस्थानों के लिए यह यंत्र बेहद उपयोगी साबित होने वाला है। शिक्षकों ने बताया कि आगे और उन्नत यंत्र विकसित करने की योजना है। उनका मानना है कि यह पहल भारतीय ज्ञान परंपरा को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिला सकती है।