यूपी में वर्ष 2024 तक 888 आदर्श ग्राम बनेंगे। सोमवार को सांसद आदर्श ग्राम योजना की कार्यशाला में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की संयुक्त सचिव अपराजिता सारंगी ने सांसदों और जिले के प्रशासनिक अधिकारियों के सामने मोदी सरकार के विजन-2024 की रूपरेखा रखी। उन्होंने कहा, 2019 तक हर सांसद तीन गांवों को विकसित करेगा। वहीं अगले पांच साल में हर साल एक गांव आदर्श ग्राम बनाना होगा।
सोमवार को डीडीयू-एसआईआरडी में आयोजित कार्यशाला में संयुक्त सचिव ने कहा कि मुझसे कहने को कहा गया है कि पूरा विकास कार्य सांसदों की देखरेख में होगा। ग्राम विकास योजना बनाने से लेकर उसके अमली जामा पहनाए जाने तक सांसद निगाह रखेंगे। इसके लिए डीएम एक कमेटी बनाकर उनकी मदद करेंगे। डीएम नोडल अधिकारी होंगे।
आंकड़े देते हुए उन्होंने कहा कि यूपी में 111 सांसद हैं। 2016 तक पहला आदर्श ग्राम बनना है। इसकी टाइमलाइन बन चुकी है। इसके बाद 2019 तक दो-दो गांव को आदर्श ग्राम बनाना है। ऐसे में 2019 तक 333 और 2024 तक अगले 555 गांव आदर्श ग्राम बन जाएंगे।
अब तक 72 सांसदों ने ही लिए गांव गोद
अपराजिता सारंगी ने चिंता जताई कि अब तक केवल 72 सांसदों ने अपने गांव गोद लिए हैं। उन्होंने सांसदों से अपील कि वह दो-तीन दिन में अपना गांव चुन लें। यह सूची हर रोज प्रधानमंत्री को भेजनी होती है।
यह है योजना की टाइम लाइन
पहला महीना- गांवों का चयन
दूसरा महीना- जागरूकता अभियान
तीसरा महीना- विकास का माहौल बनाना और पहले चरण की शुरूआत
पांचवा महीना- पहले चरण का रिव्यू
सातवां महीना- ग्राम विकास योजना बनाना
आठवां महीना- योजनाओं की संस्तुति और बजट देना
नौवां महीना- काम शुरू
12वां महीना- ग्राम विकास योजना का रिव्यू
दिक्कत हो तो यहां करें संपर्क
वेबसाइट- www.saanjhi.gov.in
मोबाइल नंबर- 9136777000
मैडम हिंदी में बोलिए
कार्यशाला के बीच संयुक्त सचिव ने अंग्रेजी में अपनी जानकारी देना शुरू की। इस पर सांसद और उनके प्रतिनिधियों ने हिंदी में बोलने के लिए कहा। उनका कहना था कि यह यूपी है और यहां हिंदी ही समझी जाती है। इसके बाद संयुक्त सचिव अंग्रेजी के साथ हिन्दी में भी बताने के लिए तैयार हुईं।
पिक्चर बहुत देखी, अब हकीकत दिखाइए
संयुक्त सचिव ने गुजरात के एक गांव के आदर्श ग्राम बनने की शॉर्ट फिल्म दिखानी चाही। इस पर संतकबीरनगर के सांसद शरद त्रिपाठी ने कहा कि पिक्चर हमने बहुत देखी हैं। अब हकीकत दिखाइए। अपने अधिकारियों की जवाबदेही तय कीजिए तो ऐसी पिक्चर यहां बहुत बन जाएंगी। हम खुद आपको बनाकर दे देंगे।
खानापूर्ति के साथ निबटी कार्यशाला
कार्यशाला में ज्यादातर सांसद गायब ही रहे। इनमें बड़े नाम तक शामिल थे। प्रशिक्षण देने वाले भी योजना की जानकारी देने तक ही सीमित रहे। हंगामे के बीच किसी सांसद या प्रशासनिक अधिकारी ने योजना को लेकर सवाल भी नहीं पूछे।
ऐसे में योजना की जानकारी देकर आयोजकों ने प्रशिक्षण खत्म करते हुए लंच का ऐलान कर दिया। लखनऊ से भी दोनों सांसद गायब रहे।
मोहनलालगंज के सांसद कौशल किशोर ने जरूर अपने प्रतितिधि विजय प्रताप सिंह को भेज दिया। जिला प्रशासन से भी सीडीओ योगेश कुमार प्रशिक्षण में पहुंचे।