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नगर निकायों में जल्द शुरू होगी समूह ‘ग’ के खाली पदों पर भर्ती, शासन ने मांगे प्रस्ताव

Sun, 19 May 2019 03:32 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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नगर निकाय व जल संस्थानों में कर्मचारियों की भारी कमी को दूर करने के लिए सरकार ने फिलहाल समूह ‘ग’ के रिक्त पदों पर जल्द भर्ती करने का फैसला किया है। सभी नगर निकायों को रिक्त पदों का प्रस्ताव शासन को भेजने को कहा गया है।

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इन प्रस्तावों का शासन स्तर से परीक्षण करने के बाद आगे की कार्यवाही के लिए उप्र अधीनस्थ सेवा चयन आयोग को भेजा जाएगा। नगर निकायों में अकेंद्रीयत सेवा वाले समूह ‘ग’ श्रेणी के 3000 से अधिक पद खाली हैं।

नगर निगमों के अलावा नगर पालिका परिषद और नगर पंचायतों में समूह ‘ग’ के विभिन्न श्रेणी के पद काफी दिनों से खाली हैं। पिछले दिनों नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने नगर निकायों में भारी संख्या में पद खाली होने से स्वच्छ भारत मिशन समेत अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही परेशानी का मुद्दा उठाया था। इस पर मुख्यमंत्री ने जल्द ही रिक्त पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू करने का आश्वासन दिया था।
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इसी कड़ी में निदेशक स्थानीय निदेशालय डॉ. काजल ने सभी नगर आयुक्तों व अधिशासी अधिकारियों के अलावा जल संस्थान के महाप्रबंधकों को अधियाचन का प्रारूप भेजते हुए रिक्त पदों पर भर्ती का प्रस्ताव 25 मई तक उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। विभागीय स्तर पर उपलब्ध सूचना के मुताबिक सिर्फ 16 नगर निगमों में ही समूह ‘ग’ के 850 से अधिक पद खाली हैं। वहीं, नगर पालिका परिषद और नगर पंचायतों में 2200 से अधिक पद काफी दिनों से खाली हैं।

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इन पदों पर होनी है भर्ती

आशुलिपिक श्रेणी-1,2 व 3, अमीन/जिलेदार, कर निरीक्षक श्रेणी-2, टैक्स कलेक्टर, प्रकाश अधीक्षक, प्रकाश निरीक्षक, ड्राफ्टमैन, फोरमैन, इलेक्ट्रीशियन, उद्यान अधीक्षक, खजांची, लिपिक श्रेणी-2, जन्म-मृत्यु लिपिक, चालक, प्रधान फीटर, कम्पाइलर, विधि अधिकारी, केमिस्ट, लेखाकार, सहायक लेखाकार, मुख्य अध्यापिका, कंपाउंडर, हकीम,  सहायक अध्यापिका (संगीत), कंप्यूटर ऑपरेटर, टाइम कीपर, कम्यूनिटी ऑर्गेनाइजर।

चुनाव की वजह से टला था अधियाचन
मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद नगर विकास विभाग का प्रयास था कि लोकसभा चुनाव के मद्देनजर आदर्श आचार संहिता लागू होने के पहले ही अधियाचन उप्र अधीनस्थ सेवा चयन आयोग को भेज दिया जाए।

इसी उद्देश्य से नगर निकायों को जनवरी में ही रिक्त पदों के बारे में प्रस्ताव भेजने का निर्देश दिया गया था, लेकिन अधिकतर नगर निकायों से सूचना नहीं मिल पाई। इसी बीच मार्च में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई तो भर्ती का मामला ठंडा पड़ गया।
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