इंडिया गठबंधन के घटक दलों के बीच लोकसभा सीटों के बंटवारे का फॉर्मूला सबसे अहम माना जा रहा है। इस लिहाज से जहां 31 अगस्त से मुंबई में होने वाली इंडिया की बैठक अहम होगी, वहीं यूपी में भी पश्चिम बंगाल और बिहार में सीटों के बंटवारे के तरीकों पर काफी कुछ निर्भर करेगा। इंडिया के सबसे मजबूत घटक दल सपा की नजर अब इसी फॉर्मूले पर है।
विपक्षी समावेशी गठबंधन इंडिया के जुलाई में हुए बंगलुरु सम्मेलन में 26 विपक्षी दल जुटे। 31 अगस्त व एक सितंबर को इंडिया की तीसरी बैठक मुंबई में होने जा रही है। जिसकी मेजबानी मुख्य रूप से शिवसेना (यूबीटी) करेगी। जबकि, राकांपा और कांग्रेस सहयोगी की भूमिका में रहेंगे। इस गठबंधन की सफलता के लिए दो अहम मुद्दे हैं। एक ये कि संयोजक कौन होगा और दूसरा ये कि सीटों के बंटवारे का फॉर्मूला क्या होगा।
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सूत्रों के मुताबिक, आहिस्ता-आहिस्ता ये दल इन मुद्दों पर सर्वमान्य हल निकालने की दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास कर रहे हैं, ताकि इंडिया को मजबूती दी जा सके। यूपी में समाजवादी नेतृत्व भी इस पर मंथन कर रहा है। क्योंकि, यहां सीटें छोड़ने पर सबसे ज्यादा अंसतोष सपा के ही कार्यकताओं और नेताओं में पैदा होगा।
कांग्रेस मांग रही यूपी में अधिक सीटें
पार्टी के भरोसेमंद सूत्रों का कहना है कि तय ये हुआ है कि इंडिया के घटक दलों के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर जो फॉर्मूला पश्चिम बंगाल और बिहार में अपनाया जाएगा, कमोबेश उसी पर यूपी में सपा चलेगी। वर्ष 2019 के चुनाव में पश्चिम बंगाल और बिहार में कांग्रेस का प्रदर्शन यूपी की तरह ही बेहद निराशाजनक रहा था। तीनों ही राज्यों में कांग्रेस को महज एक-एक सीट से ही संतोष करना पड़ा। राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि इसके बावजूद कांग्रेस यूपी समेत इन सभी राज्यों में अपनी मौजूदा हैसियत से कहीं ज्यादा सीटें मांग रही है। सपा के सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस के अलावा किसी अन्य घटक दल की ओर से इस मामले में ज्यादा दिक्कतें नहीं आएंगी। उन्हें आसानी से मना लिया जाएगा।