सपा में युवाओं के साथ ही पुराने नेताओं की राय को तवज्जो दी जाएगी। सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव चाहते हैं कि बसपा से गठबंधन, टिकट आवंटन से नाराजगी या पार्टी में उपेक्षा के चलते पार्टी से बाहर जाने वालों या अन्य कारणों से बिछड़े नेताओं को फिर पार्टी से जोड़ा जाए। वे तो शिवपाल की भी सपा में वापसी के पक्षधर हैं।
उनका कहना है कि बाहरी से ज्यादा नुकसान अंदर के लोग करते हैं। उनके सुझावों पर कुछ हद तक अमल की तैयारी है। हार के कारणों की तह तक जाने के बाद इस पर काम शुरू हो जाएगा।
पार्टी किसानों, कमजोर वर्गों की आवाज उठाने के साथ ही सर्वग्राह्य स्वरूप बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। जल्द ही इस दिशा में कुछ कदम उठाए जाएंगे।
सपा सूत्रों का कहना है कि पार्टी व गठबंधन की हार के बाद नीचे से ऊपर तक सपा संगठन में कई बदलाव देखने को मिलेंगे। संगठन में जमीनी लोगों को तरजीह देकर क्षेत्रीय व जातीय संतुलन को साधा जाएगा। संगठन के ढांचे को बूथ स्तर ले जाया जाएगा। निचले स्तर पर कार्यकर्ताओं से संवाद का सिलसिला बढ़ेगा। बड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच की दूरी कम की जाएगी।
जनहित के मुद्दों पर संघर्ष की रणनीति
पार्टी ने जनहित के मुद्दों को लेकर संघर्ष की तैयारी की है। प्रदेश सरकार के खिलाफ कानून व्यवस्था, बेरोजगारी, छुट्टा पशुओं से नुकसान, प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक, किसानों की समस्याओं जैसे मुद्दों को जोर-शोर से उठाया जाएगा।