आमतौर पर चुनाव मैदान में उतरने वाले उच्च शिक्षित तबके में ज्यादातर अधिवक्ता होते हैं। दूसरे स्थान पर प्रशासनिक अधिकारी रहते हैं। सपा के रणनीतिकारों का कहना है कि पार्टी डॉक्टर, इंजीनियर, पत्रकार, शिक्षकों सहित अन्य लोगों को मैदान में उतार कर नया संदेश देना चाहती है। इससे संबंधित वर्ग को खुद के साथ जोड़ा जाएगा।
यह भी जताने का प्रयास होगा कि पार्टी से जुड़कर समाजसेवा में लगे रहने वाले हर विधा के लोगों को पार्टी किसी न किसी रूप में मौका जरूर देती है। अभी तक ज्यादातर पार्टियां अलग-अलग विधाओं के लोगों को विधान परिषद में चुनती रही है, लेकिन सपा इस चुनाव में कुछ नया प्रयोग करने की तैयारी में है।