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हार के बावजूद मुलायम को इसी दांव पर है यकीन

Sat, 31 May 2014 10:12 PM IST
राजेंद्र सिंह/अमर उजाला, लखनऊ
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समाजवादी पार्टी ने लोकसभा चुनाव में भाजपा की तरफ खिसकी अति पिछड़ी जातियों की लामबंदी की कोशिशें शुरू कर दी हैं।
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राज्यसभा की एक सीट पर उपचुनाव के लिए सपा ने पूर्व मंत्री और पूर्व सांसद विशंभर प्रसाद निषाद को प्रत्याशी बनाया है।

सपा को लोकसभा चुनाव में करारी शिकस्त मिली है। पार्टी ने चुनाव से पहले अति पिछड़ों को जोड़ने से लिए सघन अभियान चलाया था।

अति पिछड़े वर्ग से आने वाले गायत्री प्रजापति को प्रोन्नत करके कैबिनेट मंत्री बनाया। इस वर्ग से जुड़े कई नेताओं को लालबत्ती देकर राज्यमंत्री के दर्जे से नवाजा गया।

17 जातियों को अनुसूचित में शामिल किया

17 अति पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने के लिए प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजा गया। उन्हें प्रदेश में अनुसूचित जातियों की तरह सुविधाएं देने की घोषणा की गई।

अति पिछड़ी जातियों को जोड़ने के लिए पूरे प्रदेश में यात्राएं निकाली गईं। अति पिछड़े वर्ग से जुड़े कई नेताओं को लोकसभा चुनाव में टिकट भी दिए।

लेकिन नतीजा अनुकूल नहीं रहा। चुनाव में अति पिछड़ों का झुकाव सपा की बजाय भाजपा की तरफ ज्यादा रहा। सपा सिर्फ पांच सीटों तक सीमित रह गई।

सपा नेतृत्व ने हार के बावजूद अति पिछड़ों को पार्टी से जोड़ने की मुहिम बंद नहीं की। डॉ. एसपी सिंह बघेल के इस्तीफे से रिक्त हुई राज्यसभा सीट पर होने वाले उप चुनाव के लिए सपा ने अति पिछड़े वर्ग से जुड़े पूर्व सांसद विशंभर प्रसाद को प्रत्याशी बनाया है।

भाजपा ने भी खेला अतिपिछड़ा कार्ड

अति पिछड़ों में कश्यप, बिंद, निषाद आदि जातियों की तादाद ज्यादा है। इन जातियों का नदियों से सीधा संबंध है। भाजपा ने लोकसभा चुनाव में इन जातियों को लुभाने की पूरी कोशिश की।

यही वजह है कि सपा ने भी राज्यसभा में भेजने के लिए निषाद जाति से जुड़े नेता पर दांव लगाया है। सपा के रणनीतिकार भविष्य में पिछड़ों, अति पिछड़ों और मुसलमानों की एकजुटता को ही भाजपा से मुकाबले का मुख्य फॉर्मूला मानते हैं।

सपा की योजना इसी समीकरण को पुख्ता करने की है। आने वाले दिनों में पिछड़ों, अति पिछड़ों को पार्टी में और तरजीह मिल सकती है।
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दो साल रहेगा निषाद का कार्यकाल

सपा प्रत्याशी के रूप में विशंभर प्रसाद निषाद का चुना जाना लगभग तय है। उनका कार्यकाल चार जुलाई 2016 तक रहेगा।

जिस सीट पर उनके चुने जाने की संभावना है वह बसपा के डॉ. एसपी सिंह बघेल के इस्तीफे के कारण रिक्त हुई थी। बघेल ने बसपा और राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा देकर भाजपा के टिकट पर फीरोजाबाद से लोकसभा चुनाव लड़ा था।

चार बार विधायक, एक बार सांसद रहे
विशंभर प्रसाद निषाद सपा के वरिष्ठ नेता हैं। 2012 से सपा से राष्ट्रीय महासचिव निषाद 1991, 1993, 2002 और 2007 में तिंदवारी (बांदा) से विधायक तथा 1996 में 11वीं लोकसभा के लिए फतेहपुर सीट से सपा के सांसद चुने गए थे।

एक समय वह सपा का मछुआरा चेहरा कहे जाते थे। पूर्व दस्यु सुंदरी और पूर्व सांसद फूलन देवी की रिहाई के लिए भी उन्होंने आंदोलन किया था।
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