बाराबंकी से सांसद प्रियंका रावत ने भाजपा के लिए नई मुसीबत खड़ी कर दी है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कैबिनेट बैठक में मंत्रियों से अपेक्षा की थी कि अपने किसी नाते-रिश्तेदार व परिवार के लोगों को सहायक, प्रतिनिधि या जनसंपर्क अधिकारी अथवा अन्य किसी रूप में अपने साथ नियुक्त न करें।
इसके मायने व्यापक थे। पर, सांसद रावत ने इस अपेक्षा की अनदेखी करते हुए अपने पिता उत्तम राम को अपना प्रतिनिधि नियुक्त कर डाला।
सांसद के फैसले से क्षुब्ध प्रदेश भाजपा नेतृत्व ने अब सभी सांसदों को इस सिलसिले में साफ गाइड-लाइन जारी करने का फैसला किया है।
सांसद पीछे हटने को तैयार नहीं
प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने सांसद से भी पूछताछ की बात कही है। बावजूद इसके सांसद अपने फैसले से फिलहाल पीछे हटने को तैयार नहीं दिखती हैं।
उन्हें इसमें कुछ बुराई भी नहीं दिख रही है। उनका तर्क है कि स्थानीय स्तर पर पार्टी में गुटबाजी के कारण उन्होंने ऐसा किया है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी का कहना है, सांसद का यह तर्क कि पार्टी में गुटबाजी के कारण उन्होंने अपने पिता को अपना प्रतिनिधि बनाया, ठीक नहीं है।
यह तर्क भी ठीक नहीं है कि उनके पिता पार्टी के कार्यकर्ता हैं।
सांसद से की जाएगी पूछताछ
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि सांसद से पूछताछ की जाएगी। पार्टी में कोई गुटबाजी नहीं है। गुटबाजी में फंसी पार्टी इतनी बड़ी जीत हासिल नहीं कर सकती।
बाराबंकी में तमाम ऐसे कार्यकर्ता हैं जिनकी संगठन के प्रति निष्ठा और जनता की समस्याओं के समाधान को लेकर उनकी प्रतिबद्धता पर अंगुली नहीं उठाई जा सकती।
अगर सांसद को कार्यकर्ताओं में किसी पर भरोसा नहीं है तो वह परिवार व रिश्तेदार छोड़कर अपनी पसंद के किसी अन्य व्यक्ति को अपने प्रतिनिधि या अन्य किसी रूप में नियुक्त कर सकती हैं।
प्रदेश अध्यक्ष के अनुसार, वह जल्द ही सभी सांसदों को इस सिलसिले में अलग से गाइड लाइन भेजकर प्रधानमंत्री जी की अपेक्षा के अनुरूप आचरण को कहेंगे।
सांसद ने दिया तर्क
सांसद प्रियंका का तर्क है कि पार्टी में कार्यकर्ता गुटों में बंटे हुए हैं। इसलिए उन्होंने अपने पिता को अपना प्रतिनिधि बना दिया। प्रियंका ने ‘अमर उजाला’ से कहा कि उनके पिता पार्टी के पुराने कार्यकर्ता हैं। इसलिए उन्होंने अपना प्रतिनिधि बनाया।
लोकसभा चुनाव से कुछ कुछ महीने पहले पार्टी की सदस्य बनीं प्रियंका यह नहीं बता सकीं कि उनके पिता भाजपा के सदस्य कब बने थे।
पार्टी के जिला अध्यक्ष शरद अवस्थी ने भी कहा, देखना होगा कि सांसद के पिता भाजपा के सदस्य कब बने हैं। सूत्र बताते हैं कि उत्तम पार्टी के सक्रिय सदस्य नहीं है। उत्तम राम लंबे समय तक सरकारी सेवा में थे। ऐसे में वह पार्टी के पुराने सदस्य हो भी नहीं सकते।
मोदी की भी परवाह नहीं
सांसद को जब यह याद दिलाया गया कि प्रधानमंत्री ने तो किसी नाते-रिश्तेदार व परिवार के सदस्य को इस तरह के पद न देने की अपेक्षा की है।
प्रियंका ने जवाब दिया कि अभी तक उन्हें कोई निर्देश नहीं मिला है। फिर उनके पिता उत्तम राम, पिता बाद में हैं, पार्टी के कार्यकर्ता और उनके राजनीतिक गुरु पहले हैं।
इसलिए उनकी नियुक्ति पिता के रूप में नहीं भाजपा के वरिष्ठ कार्यकर्ता के रूप में की गई है।
जब बाराबंकी के कार्यकर्ताओं में गुटबाजी खत्म हो जाएगी तो पिता को हटाकर किसी दूसरे को प्रतिनिधि बना दिया जाएगा।