बैठक में जातीय जनगणना की सभी नेताओं ने वकालत की। अंत में तय किया गया कि इस मुद्दे को निरंतर उठाया जाएगा। पार्टी की बैठक हो या धरना-प्रदर्शन सभी में इस मुद्दे को उठाया जाएगा। लोगों को बताया जाएगा कि पार्टी जातीय जनगणना के पक्ष में है, लेकिन भाजपा सरकार इसे नहीं करना चाहती है। विभिन्न अवसर पर दिए जाने वाले ज्ञापन में भी इसका जिक्र किया जाएगा।
बेरोजगारी, छात्रसंघ को मुद्दा बनाएंगे फ्रंटल संगठन
बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने सुझाव दिया कि पार्टी के विभिन्न फ्रंटल संगठन अलग- अलग मुद्दे को अपना एजेंडा बनाएंगे। युवजन सभा, लोहिया वाहिनी यूथ ब्रिगेड बेरोजगारी पर विशेष रूप से फोकस करेगी। छात्रसभा विभिन्न संस्थानों में हो रही नियुक्ति, बेरोजगारी की बढ़ती दर, छात्रसंघ चुनाव को मुद्दा बनाकर उन्हें पार्टी से जोड़ेगी।
हर बात का ध्यान से सुन रहे अखिलेश
बताया जा रहा है कि हर किसी को अपनी बात खुल कर रखने की छूट दी गई है। पार्टी के नेताओं ने जो अनुभव किए हैं और लोगों से जो फीडबैक मिला है, उसको रखने के लिए कहा गया है। इसका मुख्य कारण यह है कि नेता अपनी बात कह नहीं पाते हैं, इसलिए लोगों की भावनाओं का पता नहीं चल पाता। आखिर क्यों हो रही है हार, आखिर लोगों को किन बातों की जानकारी नहीं पहुंच रही है। आखिर सब कुछ होते हुए भी हार क्यों हो रही है। बताया जा रहा है कि इस बार की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में अखिलेश यादव एक-एक बात पर नजर रख रहे हैं। पार्टी के एक नेता ने कहा, यह सोच, निश्चित ही पार्टी को फायदा पहुंचाएगी। एक-एक प्वाइंट पर नेता जी खुद ध्यान रख रहे हैं। सभी को प्रोत्साहित भी कर रहे हैं। इसका नतीजा ही है कि आज पहले दिन की बैठक में बहुत कुछ निकलकर सामने आया।
मुस्लिम और यादव सपा के साथ
बैठक में पार्टी नेताओं ने विश्वास जताया कि आज भी एमवाई (मुस्लिम और यादव) सपा के साथ हैं और पार्टी ने संगठन को और मजबूत बनाने पर भी जोर दिया। इसके लिए आगामी दिनों में कई कदम उठाए जाएंगे। सपा नेताओं ने बताया कि बैठक में ज्यादा जोर अति पिछड़ों पर दिया गया। अति पिछड़े पार्टी की मजबूत जनाधार हैं। आज भी अति पिछड़ों का पार्टी पर पूरा भरोसा है। बैठक में ईडी और सीबीआई की छापेमारी और केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का मुद्दा भी उठा। उल्लेखनीय है कि अखिलेश यादव कल ही सार्वजनिक रूप से निंदा कर चुके हैं।