राजस्थान में गठबंधन टूटने से पहले छत्तीसगढ़ व मध्य प्रदेश में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा के साथ ही कांग्रेस नेताओं को निशाने रखा। दरअसल, मायावती ने तल्ख तेवर दिखाते हुए कांग्रेस व भाजपा को सांपनाथ-नागनाथ की संज्ञा दी तो अगले ही दिन अखिलेश ने साइकिल से हाथ हटाने की चेतावनी देकर इशारों ही इशारों मे कांग्रेस से अलग रास्ता अख्तियार करने का संकेत दे दिया। माना जा रहा है कि कांग्रेस के प्रति अखिलेश यादव के रुख में बदलाव बसपा के कारण हुआ है। राजस्थान में कांग्रेस से गठबंधन तोड़ने के पीछे भी मुख्य वजह बसपा ही है। दरअसल, यूपी में बसपा से गठबंधन के लिए त्यागा करने की घोषणा करने वाले अखिलेश नहीं चाहते कि कांग्रेस को लेकर सपा-बसपा का रुख अलग-अलग रहे। यदि सपा राजस्थान में कांग्रेस से गठबंधन कर लेती तो कांग्रेस को लेकर उनकी राय जुदा हो जाती। अखिलेश यादव ने कांग्रेस से दूरी बनाकर एक तरह से मायावती के एजेंडे को ही आगे बढ़ाया है।
तीन हिंदी भाषी राज्यों में कांग्रेस, सपा और बसपा के अलग-अलग चुनाव लड़ने का असर प्रदेश की सियासत पर पड़ने की संभावना है। अभी तक प्रदेश में भाजपा के खिलाफ महागठबंधन की तैयारी चल रही है। इसमें सपा-बसपा-रालोद के साथ ही कांग्रेस के भी शामिल रहने की अटकलें लगाई जा रही थी। अब, हो सकता है कि प्रस्तावित गठबंधन में कांग्रेस की हिस्सेदारी न रहे। ऐसे में कांग्रेस को अकेले चुनाव लड़ना पड़ सकता है।