akhilesh mayawati rahul
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अखिलेश और मायावती, दोनों ने ही कांग्रेस के प्रति नरम रुख दिखाया है। यह इस बात का संकेत है कि भाजपा के खिलाफ महागठबंधन बनाने की कोशिशें हो सकती हैं। दोनों ने ही कांग्रेस से अच्छे संबंधों का दावा किया है।
अभी यह साफ नहीं है कि रालोद की इस गठबंधन में क्या भूमिका होगी। जिस तरह राज्यसभा चुनाव में वोट निरस्त करने के बाद अजित सिंह ने अपने विधायक को दल से निष्कासित किया है, उससे महागठबंधन में रालोद के शामिल रहने की उम्मीद बढ़ी है। पश्चिमी यूपी के एक-डेढ़ दर्जन जिलों में जाट मतदाताओं की भूमिका को देखते हुए रालोद भी गठबंधन का हिस्सा बन सकता है।
भाजपा सांसद हुकुम सिंह के निधन के कारण कैराना लोकसभा सीट पर उपचुनाव होगा। रालोद चाहता है कि इस सीट पर जयंत चौधरी को लड़ाया जाए। रालोद नेताओं का कहना है कि सवाल एक सीट के चुनाव का नहीं, पश्चिमी यूपी में राजनीतिक समीकरण बनाने का है।
यूं भी 2014 की तुलना में वेस्ट यूपी के हालात काफी बदल चुके हैं। पूर्व सांसद अमीर आलम, पूर्व मंत्री कोकब हमीद, पूर्व विधायक नवाजिश आलम खान समेत कई प्रमुख मुस्लिम नेता रालोद में शामिल हो चुके हैं। हालांकि इस बाबत अभी कोई फैसला नहीं हुआ है।