फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Lucknow News: शिक्षा से पहले सुरक्षा की चिंता, जर्जर स्कूलों में लौटेंगे बच्चे

विज्ञापन
शिक्षा से पहले सुरक्षा की चिंता, जर्जर स्कूलों में लौटेंगे बच्चे
विज्ञापन
लखनऊ। राजधानी में 25 जून से परिषदीय विद्यालयों में नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने जा रहा है, लेकिन इससे पहले बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिले के 152 परिषदीय विद्यालय ऐसे हैं, जिनकी भवन स्थिति को लेकर पूर्व में जिलाधिकारी की ओर से गठित समिति जांच कर चुकी है। इनमें 14 विद्यालय अत्यंत जर्जर पाए गए हैं। विभाग का दावा है कि इन विद्यालयों के लिए नए भवन का निर्माण कराया जाएगा, लेकिन इसकी समय सीमा अभी स्पष्ट नहीं है।
विज्ञापन

जांच के दौरान 28 विद्यालय ऐसे मिले, जिनका इंजीनियरों से मूल्यांकन कराने के बाद ध्वस्तीकरण कराया जाएगा। वहीं 29 विद्यालयों में एक-एक कमरा जर्जर है, जिनकी मरम्मत के लिए विभाग ने बजट की मांग की है। इनमें नगर क्षेत्र के आठ विद्यालय शामिल हैं, जबकि अन्य विद्यालय माल, मलिहाबाद, काकोरी, सरोजनीनगर, मोहनलालगंज और बीकेटी क्षेत्र में स्थित हैं। ऐसे में नया सत्र शुरू होने से पहले बच्चों के लिए सुरक्षित और बेहतर भवन उपलब्ध कराने को लेकर स्थिति साफ नहीं हो सकी है।
दूसरी ओर माध्यमिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित 55 राजकीय इंटर कॉलेजों के भवनों की स्थिति संतोषजनक बताई गई है। जिले में 100 सहायता प्राप्त विद्यालय संचालित हैं। इनमें पांच विद्यालयों की हालत बेहद खराब है। हालांकि 25 विद्यालय प्रबंधक अलंकार योजना के तहत बजट प्राप्त कर अपने भवनों की मरम्मत करा चुके हैं।
विज्ञापन


बीकेटी के इन जर्जर विद्यालयों में हो रही पढ़ाई

बीकेटी क्षेत्र के उच्च प्राथमिक विद्यालय इकररिया कला, पूर्व माध्यमिक विद्यालय खेरिया, प्राथमिक विद्यालय चंदनापुर, उच्च प्राथमिक विद्यालय चौंगवा और प्राथमिक विद्यालय जालिमपुर ऐसे विद्यालय हैं, जहां जर्जर भवनों के बीच शिक्षण कार्य संचालित होने की तस्वीरें सामने आई हैं।

यहां जर्जर भवन में पढ़ेंगे विद्यार्थी

मोहनलालगंज स्थित प्राथमिक विद्यालय लालपुर का भवन भी जर्जर अवस्था में है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां अब भी जर्जर भवन में कक्षाएं संचालित होती हैं। हालांकि विभाग का दावा है कि पुराने भवन की जगह जल्द नया भवन बनाया जाएगा।

कहीं शिफ्ट हुए बच्चे, कहीं टिनशेड में कक्षाएं

बीकेटी के एक प्राथमिक विद्यालय के विद्यार्थियों को पिछले वर्ष दूसरे विद्यालय में स्थानांतरित कर दिया गया था। तब से भवन खाली पड़ा है। ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय के जर्जर होने के कारण बच्चों को पढ़ाई के लिए दूर जाना पड़ रहा है।

हजरतगंज स्थित विशन नारायण इंटर कॉलेज का जर्जर भवन दो वर्ष पहले गिरा दिया गया था। वर्तमान में यहां कक्षाएं टिनशेड में संचालित हो रही हैं। कॉलेज को उसका मूल भवन कब मिलेगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। प्रबंधन का कहना है कि उनके पास पर्याप्त बजट नहीं है।

मरम्मत से मिली राहत
चौक स्थित 112 वर्ष पुराने कालीचरण इंटर कॉलेज की भवन स्थिति भी खराब हो चुकी थी। अलंकार योजना के तहत बजट मिलने के बाद यहां मरम्मत कार्य शुरू कराया गया है। कॉलेज में लगभग 1800 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।

कोट

राजधानी में 1600 से अधिक विद्यालयों का संचालन हो रहा है। पूर्व में 152 विद्यालयों की शिकायतें थीं। डीएम की कमेटी ने जांच की थी। इसमें सभी विद्यालय जर्जर नहीं हैं। 14 विद्यालयों को नए भवन मिलेंगे, जबकि कुछ में एक-एक कमरे की मरम्मत की जरूरत है। सभी विद्यालयों को दुरुस्त कराने की प्रक्रिया चल रही है।

- विपिन कुमार, बीएसए
राजधानी के राजकीय विद्यालयों में कोई समस्या नहीं है। जो सहायता प्राप्त विद्यालय जर्जर हैं, उनमें प्रबंधकों की लापरवाही है। उन्हें अलंकार योजना के तहत बजट दिया जा रहा है। अभी तक 25 विद्यालय इसका लाभ ले चुके हैं। अन्य विद्यालयों में भी प्रबंधकों को पहल करनी होगी।

- देवेंद्र पांडेय, जिला विद्यालय निरीक्षक

शिक्षा से पहले सुरक्षा की चिंता, जर्जर स्कूलों में लौटेंगे बच्चे

शिक्षा से पहले सुरक्षा की चिंता, जर्जर स्कूलों में लौटेंगे बच्चे

शिक्षा से पहले सुरक्षा की चिंता, जर्जर स्कूलों में लौटेंगे बच्चे

शिक्षा से पहले सुरक्षा की चिंता, जर्जर स्कूलों में लौटेंगे बच्चे

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें