केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने असहिष्णुता के मुद्दे पर आमिर खान की टिप्पणी पर कटाक्ष करते किया कि भारत में तो कुछ भी नहीं पड़ोसी देश पाकिस्तान, ईरान और इराक के हालात देखने पर पता चल जाएगा कि कहां असहिष्णुता का बोलबाला है।
फिर भी यदि आमिर को विश्वास नहीं है तो अपनी पत्नी को पाकिस्तान भेजकर देख लें, उन्हें स्वयं ही वहां की सुरक्षा का हाल पता चल जाएगा।
आमिर हों या शाहरुख उन्हें मजहबी चश्मा हटाना चाहिए, उन्हें नहीं भूलना चाहिए कि इसी भारत देश ने उन्हें जाति धर्म से परे रख उनकी कला को सम्मानित किया है।
कलाकारों को यदि एवार्ड लौटाना ही था तो 84 के दंगे, भागलपुर और मुजफ्फरपुर कांड में क्यो नहीं लौटाए, दादरी तो प्रदेश का मसला था, इससे केंद्र का क्या मतलब।