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UP: सद्गुरु बोले- आध्यात्मिक जागृति आज के भारत की सबसे बड़ी आवश्यकता, आठ हजार से अधिक साधकों को किया संबोधित

Mon, 02 Mar 2026 01:54 PM IST
अनुज कुमार माई सिटी रिपोर्टर, लखनऊ

सार

ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु ने कांशीराम स्मृति उपवन में आयोजित भव्य महासत्संग में आठ हजार से अधिक साधकों को संबोधित करते हुए कहा कि आनंद के लिए स्वयं को बदलना सबसे जरूरी है, विपरीत परिस्थितियों को अवसर में बदलकर पुरुषोत्तम बनें। 
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ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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ईशा फाउंडेशन के संस्थापक व आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु ने कहा कि आध्यात्मिक जागृति आज के भारत की सबसे बड़ी आवश्यकता है। यदि मनुष्य को सच में आनंदित रहना है, तो उसे पहले स्वयं को जीवन के योग्य बनाना होगा। 

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व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों को अवसर में बदल ले, तभी वह पुरुषोत्तम कहलाने योग्य बनता है। मर्यादा पुरुषोत्तम के आने की प्रतीक्षा करने के बजाय स्वयं पुरुषोत्तम बनने का प्रयास करना चाहिए। जीवन में सौ बातें प्रतिकूल हो सकती हैं, लेकिन उनसे आप क्या बनाते हैं, यह आपका चुनाव है।

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ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु - फोटो : अमर उजाला
वह रविवार को राजधानी के कांशीराम स्मृति उपवन में आयोजित भव्य सत्संग में आठ हजार से अधिक साधकों को संबोधित कर रहे थे। अमर उजाला इस कार्यक्रम का मीडिया पार्टनर था। उन्होंने कहा कि जीवन को बदलने की कोशिश से अधिक जरूरी है स्वयं को बदलना। लखनऊ में सद्गुरु के साथ आयोजित यह पहला महासत्संग था, जिसे लेकर साधकों में विशेष उत्साह देखने को मिला। विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, वरिष्ठ आईएएस और आईपीएस अधिकारी, संस्थानों के प्रमुख तथा शहर की अन्य प्रतिष्ठित हस्तियां भी मौजूद रहीं।

आठ हजार से अधिक साधकों को किया संबोधित - फोटो : अमर उजाला
सद्गुरु ने साधकों को निर्देशित ध्यान और योग सत्र भी कराया। शांभवी महामुद्रा एक सशक्त योगिक प्रक्रिया है, जो आंतरिक संतुलन और समग्र कल्याण को सुदृढ़ करने में सहायक मानी जाती है। सद्गुरु ने इसे एक ऐसे बीज के समान बताया, जो निरंतर अभ्यास से विशाल वृक्ष का रूप ले सकता है। यह सत्संग विशेष रूप से उन साधकों के लिए आयोजित किया गया था, जिन्होंने इनर इंजीनियरिंग कार्यक्रम पूरा कर शांभवी महामुद्रा क्रिया में दीक्षा ली है।
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आठ हजार से अधिक साधकों को किया संबोधित - फोटो : अमर उजाला
पड़ोसी राज्यों से भी आए साधक
महासत्संग में दिल्ली, उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों और पड़ोसी राज्यों से साधक पहुंचे। स्वयंसेवकों के सहयोग से कार्यक्रम संपन्न हुआ। अधिक से अधिक लोगों तक साधना पहुंचाने के लिए क्षेत्र में शांभवी महामुद्रा दीक्षा कार्यक्रम किए गए थे।
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