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पुष्टाहार विभाग में बड़ा खेल, बगैर मंजूरी 312 करोड़ का भुगतान

Wed, 29 Mar 2017 01:13 PM IST
amarujala.com, written by अजीत बिसारिया
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डेमो
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सूबे में पुष्टाहार के नाम पर भ्रष्टाचार की पंजीरी खूब फांकी गई। पहले बिना टेंडर के 700 करोड़ की पंजीरी बांट दी गई। अब शासन की मंजूरी के बगैर 312 करोड़ के भुगतान का एक और मामला सामने आया है।
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बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग के निदेशक ने चहेती फर्मों को फायदा पहुंचाने के लिए पिछले साल के बकाया भुगतान के लिए शासन की इजाजत लेना भी मुनासिब नहीं समझा। इस सबका असर चालू वित्त वर्ष में पुष्टाहार योजना पर पड़ा। फरवरी से बच्चों और गर्भवती महिलाओं को पंजीरी नहीं मिल पा रही है।

चालू वित्त वर्ष में बिना टेंडर किए ही अफसरों की 10 चहेती फर्मों से पंजीरी बंटवाई जा रही है।  निदेशालय के अफसरों की मनमानी यहीं नहीं थमी। चालू वित्त वर्ष में अपनी चहेती फर्माें का वित्तीय वर्ष 2015-16 का 312 करोड़ रुपये बकाया दिखाते हुए भुगतान कर दिया।
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जबकि नियम कहता है कि पिछले वित्तीय वर्ष का बकाया भुगतान बगैर शासन की मंजूरी लिए नहीं किया जा सकता। ऐसा नहीं है कि इस पर आपत्ति नहीं जताई गई। वित्त विभाग ने इस पर आपत्ति लगाई, पर कुछ अफसरों, नेताओं और फर्म मालिकों की मिलीभगत के चलते आपत्ति वाली वह फाइल ही दबा दी गई। 
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नेशनल लैब से जांच पर सामने आ जाएगी हकीकत

demo pic - फोटो : अमर उजाला
कारस्तानी सामने आने पर निदेशालय के अफसरों में खलबली मची हुई है। इस बारे में निदेशक, बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार आनंद सिंह से उनके मोबाइल नंबर पर संपर्क करने की कोशिश की गई। उन्होंने कॉल रिसीव की, लेकिन बिना पूरी बात सुने ही फोन काट दिया। 

ये हैं चहेती 10 फर्में
मेसर्स क्रिस्टी फ्राइडग्राम चेन्नई, मेसर्स ग्रेट वैल्यू फूड्स प्राइवेट लिमिटेड नई दिल्ली, मेसर्स हेल्थ केयर एनर्जी फूड्स प्रा. लि. नई दिल्ली, मेसर्स त्रिकाल फूड एंड एग्रो प्रोडक्ट्स लि. नई दिल्ली, मेसर्स पीपीएस फूड प्राइवेट लि., मेसर्स लालजी एनर्जी फूड्स प्रा. लि. नोएडा, मेसर्स सुरुचि फूड प्रा. लि. नई दिल्ली, मेसर्स कॉन्टिनेंटल मिल्कोज नई दिल्ली, मेसर्स देवेश फूड्स एंड एग्रो प्रोडक्ट्स प्रा. लि., मेसर्स नीलगिरी फूड्स प्रा. लि. उन्नाव।

पुष्टाहार खरीद में इस वित्त वर्ष में 700 करोड़ रुपये से ज्यादा के घपले की खबर मंगलवार को ‘अमर उजाला’ में प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद भाजपा के एक राष्ट्रीय नेता ने लखनऊ में डेरा डाल दिया है। वे पंजीरी की आपूर्ति करने वाली फर्मों से सीधे जुड़े हैं। उनका एक एजेंट मंगलवार को शासन के अफसरों से भी मिला और उनसे कहा-घबराइए मत, हमें सभी को अच्छी तरह से मैनेज करना आता है।

विभागीय अधिकारी भी दबी जुबान में मानते हैं कि आंगनबाड़ी केंद्रों पर भेजी जाने वाली पंजीरी की क्वालिटी बेहद घटिया है। जो परिवार पंजीरी लेते हैं, वे खुद खाने के बजाय उसे जानवरों को डाल देते हैं। अगर पंजीरी की लैब से जांच कराई जाए तो हकीकत सामने आते देर नहीं लगेगी।
 
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