भाजपा सरकार यूपी विधानसभा चुनाव में किसानों के कर्जमाफी के वादे पर अमल के लिए विभिन्न प्रस्तावों पर विचार कर रही है। इसमें केंद्रीय वित्त मंत्रालय से सहायता मांगना व कर्ज लेने जैसे विकल्प शामिल हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी चुनावी सभाओं में प्रदेश में भाजपा सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में ही कर्जमाफी का फैसला करने की बात कही थी। कर्जमाफी की रकम काफी ज्यादा है और यह सरकार के वार्षिक बजट का एक बड़ा हिस्सा है।
सरकार वादे के मुताबिक कर्ज माफ करने के लिए इस रकम के बंदोबस्त में सभी संभव विकल्प तलाश रही है। मुख्यमंत्री आदित्यनाथ के निर्देश पर वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल सूबे के सभी लघु व सीमांत किसानों के बैंकों के जरिये लिए गए फसली ऋण माफी व बजट तैयारी को लेकर वरिष्ठ अधिकरियों के साथ लगातार बैठकें कर रहे हैं।
वित्त विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि किसानों की दशा सुधारने का प्रधानमंत्री का संकल्प पूरा करने के लिए प्रदेश सरकार दृढ़ प्रतिज्ञ है। इसके लिए ऋण माफी के विभिन्न प्रस्तावों पर विचार किया गया है।
माफ की गई धनराशि का भुगतान बैंकों को करेगी सरकार
प्रदेश सरकार माफ की गई धनराशि का भुगतान बैंकों को करेगी। सातवें वेतन आयोग की संस्तुतियां लागू करने से प्रदेश पर करीब 25 हजार करोड़ रुपये प्रति वर्ष अतिरिक्तव्यय भार आ गया है।
साथ ही लोक कल्याण संकल्प पत्र में शामिल वादों को पूरा करने के लिए भी बड़ी रकम चाहिए।
इन विकल्पों पर हो रहा विचार
किसानों के फसली ऋण माफी से पड़ने वाले भार को वहन करने वाले कई प्रस्तावों पर विचार हो रहा है। इसमें केंद्रीय वित्त मंत्रालय के अनुदान संख्या-32 के तहत ट्रांसफर-टू-स्टेट मद से सहयोग लेना तथा राज्य सरकार द्वारा ऋण लेना प्रमुख है।
ऋण सीमा में छूट के लिए केंद्र से अनुमति मांगेगी सरकार
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फिजिकल रेस्पांसबिलिटी एंड बजट मैनेजमेंट (एफआरबीएम) एक्ट के अंतर्गत हर वित्त वर्ष में राज्य सरकार द्वारा ऋण लेने की सीमा तय है। साथ ही ऋ ण की धनराशि का प्रयोग राज्यों को विकासात्मक कार्यों में करना होता है।
ऐसे में किसानों का ऋण माफ करने के लिए राज्य सरकार को अतिरिक्त ऋण की जरूरत होगी।
इसके लिए प्रदेश सरकार केंद्र सरकार से अतिरिक्त ऋण के लिए बांड की धनराशि तथा उस पर लगने वाले ब्याज को एफ आरबीएम एक्ट के अंतर्गत तय ऋ ण सीमा से बाहर रखने का अनुरोध करेगी। भारतीय रिजर्व बैंक के माध्यम से बंध पत्र जारी करने के लिए केंद्र सरकार की अनुमति जरूरी है।
इसलिए किया ऋण माफी का वादा
कृषि गणना 2010-11 के आधार पर प्रदेश में लगभग 2.30 करोड़ किसान हैं। प्रदेश में लघु एवं सीमांत किसानों की कुल संख्या 2.15 करोड़ है। इनमें सीमांत 1.85 करोड़ तथा लघु 0.30 करोड़ हैं।
प्रदेश में 2013-14 के रबी मौसम से 2015-16 के रबी मौसम तक लगातार दैवी आपदाओं के कारण फसलों पर असर पड़ा है।
इससे विशेषकर लघु एवं सीमांत कृषकों की आर्थिक दशा अत्यंत गम्भीर हो गई है। सरकार कर्ज के जाल में उलझे किसानों की मदद कर उनकी स्थिति सुधारना चाहती है।