उत्तर प्रदेश में राज्य या राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा से दाखिला पाने वालों के लिए ही शुल्क भरपाई की सुविधा देने की तैयारी चल रही है। इसके लिए शीघ्र छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना के नियमों में बदलाव हो सकता है। संबंधित अधिकारी प्रस्ताव तैयार करने में लगे हुए हैं।
प्रदेश सरकार अनुसूचित जाति व जनजाति के 2.5 लाख रुपये तक और अन्य वर्गों के लिए दो लाख रुपये तक सालाना आय होने पर छात्रवृत्ति और शुल्क भरपाई की सुविधा देती है। वर्तमान में सभी वर्गों के 55 लाख से ज्यादा छात्र इस योजना का लाभ लेते हैं। लेकिन, हर साल बजट की कमी के चलते सामान्य व पिछड़े वर्ग के 8-9 लाख पात्र छात्र भुगतान से वंचित रह जाते हैं।
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समाज कल्याण विभाग के सूत्रों के मुताबिक, तमाम निजी संस्थान अपने स्तर से विद्यार्थियों का दाखिला ले लेते हैं। समय-समय पर इसमें बड़े घोटाले भी सामने आते रहे हैं। कहीं विद्यार्थी दाखिला लेने के बाद नियमित संस्थान में नहीं आते तो कहीं छात्रवृत्ति लेने के बाद इम्तिहान नहीं देते।
व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने और आगे बढ़ने की चाह रखने वाले परिश्रमी विद्यार्थियों को ही योजना के दायरे में लाने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने के अनुरोध के साथ बताया कि इससे विद्यार्थियों में कॉमन प्रवेश परीक्षा के माध्यम से ही प्रवेश लेने की प्रवृत्ति बढ़ेगी। फर्जी छात्र दिखाकर संस्थानों द्वारा गड़बड़ करने की गुंजाइश भी कम हो जाएगी।