नाराज तीमारदारों ने इलाज में घोर लापरवाही का आरोप लगाकर हंगामा शुरू किया। सूचना पाकर पहुंची पुलिस ने उन्हें शांत कराया। मंशा का आरोप है कि तीन दिन के इलाज का अस्पताल ने करीब 90 हजार रुपये का बिल थमा दिया। रुपये वसूलने बाद ही शव ले जाने दिया गया।
इमरजेंसी में मरीज आई थी। सिजेरियन ऑपरेशन न करने से उसकी जान को भी खतरा हो सकता था। बच्चा प्री-मेच्योर था। उसकी धड़कन भी गड़बड़ थी। इलाज में किसी तरह की लापरवाही नहीं हुई है। तीमारदारों के आरोप बेबुनियाद हैं।
- डॉ. अस्मिता सिंह, निदेशक, चंदन अस्पताल
मामले की कर रहे जांच
तीमारदार की ओर से केस दर्ज कराने को तहरीर मिली है। जांच कराई जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट सीएमओ के यहां भेजी जा रही है। वहां से मिलने वाली जांच रिपोर्ट के आधार पर मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई होगी।
- राजीव द्विवेदी, इंस्पेक्टर विभूतिखंड