संघ ने सेवा भारती को सामाजिक समरसता सद्भाव यात्रा के जरिये भी दलितों को मुख्यधारा से जोड़ने की जिम्मेदारी सौंपी है। यात्रा के साथ चल रहे लोग और साधु-महात्मा दलितों को हिंदू समाज का अभिन्न हिस्सा बताकर बरगलाने वालों से उन्हें सावधान करेंगे। वे दलितों तथा पिछड़ों के साथ भोजन करेंगे। उनकी समस्याओं और शंकाओं का निवारण के साथ उन्हें प्रयाग कुंभ का न्यौता भी देंगे। इन परिवारों के दिव्यांग या रोगी सदस्य को मदद भी दी जाएगी।
भाऊराव देवरस सेवा न्यास की तरफ से कुंभ के दौरान चिकित्सा एवं सेवा शिविर लगाने की तैयारी है। सेवा भारती, सेवा कुंभ से दलितों को अपनेपन का एहसास कराएगा। साहित्य परिषद की तरफ से साहित्य कुंभ के जरिये भावी पीढ़ी को कुंभ के महत्व और सरोकारों की जानकारी देने की कोशिश होगी।
दिव्यांगों को सहायक उपकरण दिए जाएंगे तो दलितों व पिछड़ों और गरीबों की आंखों के ऑपरेशन का भी एक बड़ा शिविर कुंभ के दौरान प्रयाग में लगेगा। भाजपा ने पहले ही पांच वैचारिक कुंभ करके प्रयाग कुंभ के सरोकारों से खुद को जोड़कर संदेश देने की तैयारी कर ली है।
भाजपा के प्रदेश महामंत्री विजय बहादुर पाठक कहते भी हैं, हमारी पार्टी का मुद्दा वैसे तो विकास है, पर संस्कृति, परंपरा, विरासत और पहचान भी हमारे लिए महत्वपूर्ण है। कुंभ हमारी परंपराओं और आस्था से जुड़ा और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है।
कुंभ के सहारे हम यह बताना चाहते हैं कि हिंदुत्व दर्शन और संस्कृति में ऊंच-नीच और छुआछूत नहीं है। मानव समाज का कल्याण ही हिंदुत्व का लक्ष्य है। इसीलिए कुंभ का दिव्य और भव्य आयोजन हमारे लिए भावात्मक मुद्दा है।