राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भगवा एजेंडे व अपने तेवर को धार देने की राह पर आगे बढ़ गया है। इसके लिए संघ परिवार के संगठनों के प्रमुख लोगों के तत्वावधान में प्रत्येक जिले में एक टोली गठित करने का फैसला किया गया है।
इसे मंदिरों व भारतीय संस्कृति से जुड़े स्थलों की खोज का काम सौंपा जाएगा। स्थानीय स्तर पर गठित होने वाली टोली इन स्थलों की सूची बनाएगी। इनमें जिन स्थानों को धार्मिक व सांस्कृतिक रूप से पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है उनकी प्राथमिकता सूची बनेगी।
जानकारी के मुताबिक, सूची बनाने का काम प्रांतवार होगा। साथ ही यह ध्यान भी रखा जाएगा कि वे स्थल प्राथमिकता के आधार पर सूची में सबसे ऊपर हों, जिनका न सिर्फ स्थानीय स्तर पर बल्कि आसपास के कुछ जिलों तक प्रभाव हो। लोगों का उन स्थलों पर आने-जाने का सिलसिला जारी रहता हो।
स्थानीय टोली के द्वारा तैयार सूची का संकलन करके संघ का प्रांतीय नेतृत्व दूसरी सूची बनाएगा। साथ ही इन स्थानों का धार्मिक परंपराओं व महत्व के मद्देनजर विकास कराने के लिए केंद्र सरकार से पैरवी की जाएगी। प्रदेश सरकार पर भी इस काम को कराने के लिए दबाव डाला जाएगा।
कमजोर पड़ी है संघ की पैठ
इसके लिए स्थानीय स्तर पर जनजागरण के कार्यक्रम आयोजित करने का भी निश्चय किया गया है। स्थानीय प्रशासन से भी संबंधित स्थल के विकास के बारे में बातचीत करने की योजना है।
दरअसल, संघ नेतृत्व लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में भाजपा की भारी जीत के बावजूद संघ परिवार की जमीनी पकड़ से संतुष्ट नहीं है। उसे यह भी पता है कि सार्वजनिक रूप से भले ही वह चाहे जो दावा करता हो लेकिन पहले की तुलना में उसकी भी पकड़ व पैठ कहीं न कहीं कमजोर पड़ी है।
वह चाहता है कि संघ परिवार कुछ ऐसे मुद्दों को लेकर आगे बढ़े जिनके सहारे हिंदू समाज में संघ की पैठ बनाई जा सके। संघ यह भी चाहता है कि पकड़ सीधे तौर पर उसकी हो।
संगठन के विस्तार पर बल
संघ के रणनीतिकारों का आकलन है कि इस मुहिम के जरिये न सिर्फ वह दूरदराज के ग्रामीण इलाकों तक पहुंच सकेगा बल्कि मामला स्थानीय पहचान से जुड़ा होने के कारण लोगों को भावनात्मक रूप से भी जोड़ने में सुविधा रहेगी।
इस बहाने संघ को अपनी हिंदू हितैषी छवि को भी धार देन का मौका मिलेगा। योजना है कि इस मुहिम के जरिये संघ के नजदीक आने वाले लोगों को स्थायी तौर पर संगठन से जोड़कर प्रत्यक्ष रूप से संघ का दायरा बढ़ाया जाए।