राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अब गांवों में पकड़ व पैठ बनाने तथा ग्रामीणों के दिल में उतरने पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला किया है। इसके लिए सेवा कार्यों के विस्तार पर मुख्य जोर रहेगा। संघ के सरकार्यवाह सुरेश जोशी भैयाजी ने उत्तर प्रदेश के पांच दिन के प्रवास के पहले दिन मंगलवार को यहां अपने कामकाज से यह साफ कर दिया।
शायद यही वजह है कि इस बार बैठक का परंपरागत स्वरूप भी बदल दिया गया है। यहां उन्होंने संघ के क्षेत्रीय पदाधिकारियों, वनवासी कल्याण आश्रम व सेवा भारती के अधीन काम करने वाले संगठनों के पदाधिकारियों से बातचीत की।
उद्देश्य की सफलता के लिए सरकार्यवाह ने खुद भी गांव वालों से बातचीत करके उनका मनोविज्ञान समझने की योजना बनाई है। इसीलिए उन्होंने प्रवास के पहले दिन की बैठक यहां आईआईएम रोड पर ग्रामीण इलाके में स्थित एक निजी स्कूल में की।
उन्होंने आसपास के गांव वालों से बातचीत करके संघ के कामकाज के बारे में उनकी जानकारी का स्तर समझा। साथ ही उनके बीच संपर्क व संवाद रखने का आश्वासन देते हुए ग्रामीणों के बीच संघ के प्रत्यक्ष काम को बढ़ाने की संभावनाएं टटोलीं।
इन मुद्दों पर ली जानकारी
बुधवार सुबह सरकार्यवाह सीतापुर जाएंगे। वहां भी लहरपुर रोड स्थित एक स्कूल में संघ के अवध प्रांत के प्रचारकों के साथ बैठक करेंगे। साथ ही आसपास के लगभग 25 गांवों के लोगों से बातचीत करके ग्रामीणों के बीच संघ के कामकाज को बढ़ाने व मजबूत बनाने के उपायों के बारे में समझेंगे।
सरकार्यवाह ने संघ के क्षेत्रीय पदाधिकारियों से बातचीत करके कहां कितनी शाखाएं चल रही हैं, संघ के प्रकल्पों के कितने कार्य चल रहे हैं, कहां-कहां और सेवा कार्य बढ़ाकर लोगों को जोड़ा जा सकता है, सेवा कार्यों के तहत शिक्षा, चिकित्सा व सहायता के अलावा और कौन-कौन से काम किए जा सकते हैं, की जानकारी ली।
शाखाओं के विस्तार तथा स्वयंसेवकों की संख्या बढ़ाने के बारे में भी विचार-विमर्श किया। माना जा रहा है कि प्रवास के दौरान इस तरह की बैठकों से निकले निष्कर्षों के आधार पर संघ का शीर्ष नेतृत्व संगठन की मजबूती की कार्ययोजना बनाकर उसे लागू करेगा।
दलितों और पिछड़ों के लिए तैयार हो रहा एजेंडा
गौरतलब है कि पिछले माह लखनऊ में ही हुई संघ के केंद्रीय कार्यकारी मंडल की बैठक में गांवों व ग्रामीणों के बीच अपेक्षाकृत बहुत मजबूत पकड़ न होने पर चिंता जताई गई थी।
साथ ही पिछड़ों व दलित वर्ग के लोगों को नजदीक लाने पर भी जोर दिया गया था। समझा जा सकता है कि सरकार्यवाह ने उसी सिलसिले में ये बैठकें शुरू की हैं।
गांवों के लोगों से सीधे संवाद व संपर्क से गांवों के लोगों को यह संदेश देने कोशिश हो रही है कि संघ का शीर्ष नेतृत्व भी उनको लेकर चिंतित है, वहीं इसके जरिये दलितों व पिछड़ों को जोड़ने के एजेंडे पर भी अमल की पृष्ठभूमि तैयार की जा रही है।