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संघ ने दी सफाई, कभी नहीं किया रोजा इफ्तार

Sat, 18 Jul 2015 02:58 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने मुस्लिम राष्ट्रीय मंच और उसके रोजा इफ्तार से पल्ला झाड़ लिया है। संघ की तरफ से कहा गया है कि मुस्लिम राष्ट्रीय मंच मुस्लिमों का स्वतंत्र एवं स्वायत्त संगठन है। यह संघ से संबद्ध नहीं है। इसलिए मंच की तरफ से रोजा इफ्तार सहित जो भी कार्यक्रम होते हैं, वे संघ के कार्यक्रम नहीं है।
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उधर, मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय सह संयोजक महिरध्वज सिंह ने भी संघ की बात से सहमति जताई है। उन्होंने कहा कि यह सही है कि मंच आरएसएस का आनुषांगिक संगठन नहीं है। इसकी स्थापना संघ ने नहीं बल्कि, मौलाना वहीउद्दीन खां और मुजफ्फर हुसैन ने की थी।

माना जाता है कि संघ को यह सफाई अपनी साख और पहचान बनाने के लिए देनी पड़ी है। संघ के रणनीतिकारों को लग रहा है कि मंच की तरफ से रोजा इफ्तार, ईद मिलन या उलमा सम्मेलन जैसे कार्यक्रमों को संघ के कार्यक्रम बताने से उनकी पहचान व साख के लिए संकट खड़ा हो रहा है।
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आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख डॉ. मनमोहन वैद्य ने शुक्रवार को इस मुद्दे पर सफाई जारी की। डॉ. वैद्य ने कहा कि मुस्लिम मंच के कार्यक्रम संघ द्वारा आयोजित हैं, यह कहना गलत है। मंच एक स्वतंत्र व स्वायत्त संगठन है। इसे राष्ट्रवादी मुसलमानों का संगठन माना जाता है। इसलिए मंच के निमत्रंण पर स्वयंसेवक भी सामान्य नागरिक की तरह कार्यक्रमों में शामिल होते हैं।
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मुसलमानों को एकजुट कर मुख्यधारा में लाना ही मकसद

डॉ. मनमोहन वैद्य ने कहा कि आनुषांगिक संगठन होता तो बैठक में प्रतिनिधि बुलाए जाते मंच के राष्ट्रीय सहसंयोजक महिरध्वज सिंह ने कहा कि संघ के जो भी आनुषांगिक संगठन होते हैं, उनके प्रतिनिधि संघ की बैठकों में जाते हैं।

मंच अगर आनुषांगिक संगठन होता तो इसके प्रतिनिधि भी संघ की बैठकों में जाते। इस सवाल पर कि फिर आप या संघ के वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार कार्यक्रमों में क्यों रहते हैं। सिंह तर्क देते हैं कि मंच द्वारा राष्ट्रवादी मुसलमानों को जोड़ने का काम किया जाता है। इसका सभी राष्ट्रवादी लोग स्वागत करेंगे। उसी रूप में हमारी भी कोशिश इन लोगों को सहयोग करने की है।

उन्होंने कहा कि संघ की तरफ से कभी रोजा इफ्तारी नहीं की गई। मंच राष्ट्रवादी मुसलमानों को एकजुट करके देश की मुख्यधारा में उन्हें लाना चाहता है। साथ ही मुसलमानों व हिंदुओं के बीच भ्रमों को समाप्त करना चाहता है। इस काम में सहयोग करना अनुचित तो नहीं कहा जाएगा।
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